– आईआरजीसी का दावा,खामेनेई का जनाजा पहुंचने से पहले दो पुल ध्वस्त,
– अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी मिसाइल-दावा
नई दिल्ली :- अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (हॉर्मुज स्ट्रेट) में तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने लगातार दूसरी रात ईरान के विभिन्न ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किये। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है।
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी हमलों को खुली आक्रामकता करार देते हुए कड़े जवाब की चेतावनी दी है। बहरीन और कुवैत में एयर रेड सायरन बजाए गए हैं, जबकि बंदर अब्बास, बुशेहर, चाबहार, जास्क और अबू मूसा द्वीप सहित हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े कई इलाकों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। इसी बीच, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया उनके गृह नगर मशहद में चल रही है। इस दौरान ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि अमेरिका ने मशहद जाने वाले दो महत्वपूर्ण पुलों को हवाई हमलों में निशाना बनाकर नष्ट कर दिया। आईआरजीसी का आरोप है कि यह हमला अंतिम विदाई समारोह को प्रभावित करने की कोशिश थी।
आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिका की इस कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। संगठन के अनुसार, जवाबी कार्रवाई के पहले चरण में उसकी नौसेना और एयरोस्पेस फोर्स ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किये। आईआरजीसी ने दावा किया कि कुवैत के आरिफजान और अली अल सलेम तथा बहरीन के जुफैर और शेख ईसा स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि अमेरिका आगे भी हमले जारी रखता है तो क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी सैन्य अड्डों को भी निशाना बनाया जाएगा।
‘हमला करोगे तो जवाब मिलेगा‘
इस बीच, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने लिखा, ‘हमला करोगे तो जवाब मिलेगा।‘ उन्होंने कहा कि धमकियां और वादाखिलाफी अब बिना कीमत चुकाए संभव नहीं हैं। गालिबाफ ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां जहाजों की आवाजाही ईरान की व्यवस्था के तहत होगी, न कि अमेरिकी दबाव में। उन्होंने अमेरिका को आगाह करते हुए कहा कि यदि उसने आक्रामक कार्रवाई जारी रखी तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।




