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बाघिन को पकड़ने खुद पिंजरे में बैठी लेडी डॉक्टर

नागपुर :- नागपुर जिले के उमरेड वन परिक्षेत्र में दो लोगों की जान लेने वाली और कई दिनों से वन विभाग को चकमा दे रही बाघिन को आखिरकार बेहोश कर सुरक्षित पकड़ लिया गया। इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि महिला पशु चिकित्सक डॉ. प्रियल चौरागड़े ने खुद पिंजरे के भीतर बैठकर बाघिन पर सटीक ट्रैंक्विलाइज़र (बेहोशी का इंजेक्शन) दागा। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र में किसी बाघ को ट्रैंक्विलाइज़ करने वाली वह पहली महिला पशु चिकित्सक बनी हैं।

करीब ढाई से तीन वर्ष आयु की इस बाघिन ने 27 मार्च को निर्मला गभणे तथा 6 जून को दिगंबर पाटिल पर हमला कर उनकी जान ले ली थी। दोनों खेत में काम कर रहे थे। इसके अलावा बाघिन के हमले में दो-तीन अन्य लोग घायल भी हुए थे। लगातार हमलों के कारण क्षेत्र में दहशत का माहौल था और ग्रामीणों ने बाघिन को पकड़ने की मांग को लेकर चक्काजाम आंदोलन भी किया था। इसके बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एम.एस. रेड्डी से अनुमति मिलने पर विशेष रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। अभियान के दौरान बाघिन बचाव दल के वाहनों की आहट से सतर्क हो जाती थी, जिससे प्रारंभिक रणनीति बदलनी पड़ी। समय कम होने और बाघिन के भाग निकलने की आशंका को देखते हुए टीम ने नई योजना बनाई। बाघिन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए गए और दो स्थानों पर चारा भी बांधा गया। हालांकि बाघिन ने चारे की बजाय एक आवारा पशु का शिकार कर उसे जंगल में खींच लिया।

बाघिन के उसी क्षेत्र में मौजूद होने की पुष्टि होने पर वन्यजीवों के परिवहन में उपयोग किए जाने वाले विशेष पिंजरे को सुरक्षित स्थान पर रखा गया। इसी पिंजरे में डॉ. प्रियल चौरागड़े और उनके सहयोगी प्रतीक घाटे बैठ गए। मौके की प्रतीक्षा करने के बाद डॉ. चौरागड़े ने बाघिन पर सटीक निशाना लगाते हुए उसे बेहोश कर दिया, जिसके बाद वन विभाग ने उसे सुरक्षित पकड़ लिया। वन विभाग के अनुसार, बाघिन को सुरक्षित रेस्क्यू कर आगे की निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्थानांतरित किया जाएगा।

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