– स्थायी समिति की बैठक में 10 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव
नागपुर :- नागपुर महानगरपालिका ने हाल ही में पेश किए गए ‘नो न्यू टैक्स’ बजट के बाद अब शहरवासियों पर संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) का अतिरिक्त बोझ डालने की तैयारी शुरू कर दी है। 27 जून को प्रस्तुत बजट में नए कर या मौजूदा करों में वृद्धि नहीं करने का दावा किया गया था, लेकिन अब 10 जुलाई को होने वाली स्थायी समिति की पहली बैठक के एजेंडे में संपत्ति कर में औसतन 10 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव शामिल किया गया है।
यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो एनएमसी को करीब 15.42 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की संभावना है। यह प्रस्ताव संपत्ति कर विभाग द्वारा वार्षिक कर दर संशोधन प्रक्रिया के तहत तैयार कर स्थायी समिति के समक्ष रखा गया है। 27 जून को स्थायी समिति की अध्यक्ष शिवानी दाणी ने बजट प्रस्तुत करते समय स्पष्ट कहा था कि इस वर्ष नागरिकों पर किसी भी प्रकार का नया कर नहीं लगाया गया है और न ही किसी मौजूदा कर में वृद्धि की गई है। ऐसे में बजट पेश होने के कुछ ही दिनों बाद संपत्ति कर बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आने से इस मुद्दे पर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा तेज होने की संभावना है। अब सभी की नजरें स्थायी समिति की अध्यक्ष शिवानी दाणी के निर्णय पर टिकी हैं। यदि समिति इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो शहरवासियों को अगले संपत्ति कर बिल में बढ़ा हुआ कर चुकाना पड़ सकता है।
महाराष्ट्र मनपा अधिनियम के तहत प्रस्ताव
यह प्रस्ताव महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम की धारा 99 के तहत लाया गया है। इस धारा के अनुसार मनपा को संपत्ति कर की दरें निर्धारित एवं संशोधित करने का अधिकार प्राप्त है। नियमों के अनुसार कर दरों में संशोधन का प्रस्ताव सामान्यतः फरवरी माह में स्वीकृत होना चाहिए था, लेकिन इस वर्ष स्थायी समिति का बजट ही निर्धारित समय से बाद में पेश किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो बढ़ी हुई कर राशि आगामी संपत्ति कर बिलों में जोड़कर वसूली की जाएगी।
सीवरेज और फायर टैक्स भी दोगुना करने का प्रस्ताव
संपत्ति कर में वृद्धि के अलावा प्रस्ताव में सीवरेज बेनिफिट टैक्स को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत तथा फायर टैक्स को भी 1 प्रतिशत से 2 प्रतिशत करने की सिफारिश की गई है। इन संशोधनों के बाद संपत्ति कर संग्रह में औसतन 10 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, प्रस्ताव में राज्य शिक्षा उपकर (स्टेट एजुकेशन सेस), रोजगार गारंटी उपकर (एम्प्लॉयमेंट गारंटी सेस) तथा बड़े आवासीय भवन कर की दरों में किसी प्रकार का बदलाव करने की सिफारिश नहीं की गई है।
नागरिकों पर बढ़ सकता है आर्थिक बोझ
यदि स्थायी समिति इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो हजारों संपत्ति धारकों को पहले की तुलना में अधिक कर देना होगा। ऐसे में बजट के दौरान किए गए ‘नो न्यू टैक्स’ के दावे और अब कर वृद्धि के प्रस्ताव को लेकर नागरिकों तथा जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब यह फैसला शुक्रवार को होने वाली स्थायी समिति की बैठक में लिया जाएगा।




