नागपुर में ओवरलोडिंग का ‘खेल’!

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– 10 हजार दो, कार्रवाई से छूट?

– एसोसिएशन का अवैध वसूली और चुनिंदा वाहनों को संरक्षण देने का आरोप

नागपुर :- पुलिस से लेकर जिलाधिकारी तक शिकायतें करने के बावजूद ओवरलोडिंग के नाम पर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के कुछ अधिकारियों द्वारा कथित अवैध वसूली जारी होने का आरोप नागपुर ट्रेलर्स ओनर्स एसोसिएशन ने लगाया है। सोमवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र मिश्रा ने दावा किया कि कुछ आरटीओ अधिकारियों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की कथित मिलीभगत से ओवरलोडिंग का रैकेट चलाया जा रहा है। आरोप है कि अवैध रकम देने वाले वाहनों को क्षमता से करीब 50 टन तक अतिरिक्त माल ढोने की छूट दी जाती है, जबकि नियमों का पालन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाती है।

एसोसिएशन का कहना है कि ओवरलोडिंग और कथित अवैध वसूली के संबंध में पुलिस, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित अधिकारियों को कई बार शिकायतें दी गईं। कुछ समय तक कार्रवाई होती है, लेकिन बाद में स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। संगठन का आरोप है कि फिलहाल भी कथित अवैध वसूली जारी है।

तीन महीने से चल रहा अभियान

नागपुर ट्रेलर्स ओनर्स एसोसिएशन के अनुसार, पिछले तीन महीनों से ओवरलोडिंग के खिलाफ जागरूकता और वैधानिक अभियान चलाया जा रहा है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को लगातार ज्ञापन देकर अवैध ओवरलोड परिवहन पर रोक लगाने की मांग की गई, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि कुछ आरटीओ अधिकारियों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की कथित मिलीभगत से ओवरलोडिंग का नेटवर्क संचालित हो रहा है। दावा किया गया कि प्रति ट्रक हर महीने 10 हजार रुपये या उससे अधिक राशि देने वाले वाहनों को क्षमता से लगभग 50 टन अतिरिक्त माल ले जाने की अनुमति मिल जाती है और ऐसे वाहनों पर कार्रवाई नहीं होती।

नियम मानने वालों पर ही कार्रवाई?

एसोसिएशन का कहना है कि उसके सदस्य अब पूरी तरह नियमों के अनुसार परिवहन कर रहे हैं। इसके बावजूद यदि किसी वाहन में गलती से एक टन अतिरिक्त माल भी मिल जाए तो तत्काल कार्रवाई की जाती है, जबकि कथित संरक्षण प्राप्त वाहनों को नजरअंदाज किया जाता है। इससे ईमानदार ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के साथ अन्याय हो रहा है। संगठन के मुताबिक, ओवरलोड वाहनों के कारण सड़कों की आयु कम होती है, दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है, आम लोगों की जान जोखिम में पड़ती है और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान होता है। साथ ही नियमों का पालन करने वाले ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का व्यवसाय भी प्रभावित होता है।

पहले भी लगे थे ऐसे आरोप :

एसोसिएशन ने बताया कि कुछ दिन पहले एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी ने भी पत्रकार वार्ता कर आरोप लगाया था कि कुछ एजेंट संबंधित अधिकारियों की कथित मिलीभगत से वाहनों से अवैध वसूली करते हैं और बदले में ओवरलोड वाहनों को संरक्षण दिया जाता है। संगठन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

सरकार से क्या मांग?

नागपुर ट्रेलर्स ओनर्स एसोसिएशन ने महाराष्ट्र सरकार से पूरे कथित ओवरलोडिंग रैकेट की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित आरटीओ अधिकारियों, एजेंटों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि ईमानदार परिवहन व्यवसायियों का विश्वास बहाल हो सके।