– फिर छिड़ेगी पुरानी बहस, 28 को होगी मनपा की महासभा
नागपुर :- नागपुर महानगरपालिका के प्रशासनिक जोनों की संख्या 10 से बढ़ाकर 12 करने का प्रस्ताव एक बार फिर चर्चा का विषय बनने जा रहा है। 28 जुलाई को होने वाली महासभा की बैठक में भाजपा के वरिष्ठ नगरसेवक सुधीर (बंडू) राऊत इस मुद्दे को उठाते हुए प्रशासन से जवाब मांगेंगे कि क्या दो नए जोन बनाए जाने से शहर का प्रशासन अधिक प्रभावी और जनहितकारी होगा।
राऊत का कहना है कि शहर की लगातार बढ़ती आबादी और तेजी से फैलते शहरी क्षेत्र को देखते हुए छोटे प्रशासनिक क्षेत्र आवश्यक हो गए हैं। उनका मानना है कि नए जोन बनने से नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों में तेजी आएगी, शिकायतों का शीघ्र समाधान होगा और विकास कार्यों की बेहतर निगरानी की जा सकेगी। वर्तमान में 227 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली एनएमसी का प्रशासन 10 जोनल कार्यालयों के माध्यम से संचालित होता है।हालांकि, मनपा के वरिष्ठ अधिकारी इस प्रस्ताव को लेकर आशंकित हैं। उनका कहना है कि दो नए जोन बनाने के लिए नए कार्यालय, भवन, अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति और अन्य संसाधनों पर भारी खर्च करना पड़ेगा। इसके अलावा मौजूदा 38 प्रभागों का पुनर्विभाजन करना होगा, जोन समितियों के नए चुनाव कराने होंगे तथा नए जोन अध्यक्षों की नियुक्ति भी करनी पड़ेगी।

सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2012-13 में तत्कालीन मनपा आयुक्त श्याम वर्धने के कार्यकाल में भी ऐसा प्रस्ताव सामने आया था। उस समय निर्वाचित निकाय इसके पक्ष में था, लेकिन प्रशासन ने राज्य सरकार को सलाह दी थी कि मौजूदा 10 जोन की व्यवस्था ही पर्याप्त है और इसे बदलने की आवश्यकता नहीं है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि वर्तमान में कई जोनल कार्यालय स्वयं स्थान की कमी से जूझ रहे हैं। कुछ कार्यालयों में कर्मचारियों के बैठने और बैठक आयोजित करने के लिए भी पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नए जोन बनाने के बजाय मौजूदा ढांचे को मजबूत करना अधिक व्यावहारिक होगा।
तेज हो सकती है प्रशासनिक और राजनीतिक बहस
इस प्रस्ताव के राजनीतिक मायने भी माने जा रहे हैं। वर्ष 2026 के नगर निगम चुनाव के बाद गठित महासभा ने 38 प्रभागों के साथ 10 जोन की मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखने का निर्णय लिया था। सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न प्रभागों का पुनर्विन्यास कर जोन समितियों और जोन अध्यक्षों पर प्रभाव बनाए रखने की राजनीतिक कोशिशें भी समय-समय पर होती रही हैं। ऐसे में 12 जोन बनाने का प्रस्ताव प्रशासनिक के साथ-साथ राजनीतिक बहस भी तेज कर सकता है।





