– किसानों का ग्रापं और जिप के खिलाफ अनोखा विरोध, 26 साल से बदहाल सड़क
नागपुर/भंडारा :- गोसीखुर्द पुनर्वास परियोजना के अंतर्गत आने वाले पुरानी पिपरी, चिंचोली और साहुली क्षेत्र के किसानों ने वर्षों से खराब सड़क की समस्या से परेशान होकर गुरुवार को सड़क पर ही धान की रोपाई कर ग्राम पंचायत और जिला परिषद के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया।
किसानों का कहना है कि बारिश शुरू होते ही यह सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाती है। कई बार शिकायतें और मांगें करने के बावजूद आज तक सड़क का निर्माण नहीं किया गया। इससे खेती, आवागमन और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वर्ष 2005 में गोसीखुर्द परियोजना के तहत भंडारा जिले के पिपरी गांव का पुनर्वास किया गया था, लेकिन गांव की करीब 250 से 300 एकड़ कृषि भूमि आज भी पुराने गांव में ही है। पुनर्वसित गांव से यह क्षेत्र 8 से 10 किलोमीटर दूर होने के कारण करीब 70 से 80 परिवार अब भी पुराने गांव में रहते हैं। इसके अलावा साहुली, चिंचोली, नदी पार स्थित नवेगांव और आवरमारा के ग्रामीण भी इसी सड़क का उपयोग करते हैं।
सन 2000 से अब तक नहीं हुआ सड़क निर्माण
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2000 से अब तक जिला परिषद के अधीन इस सड़क का निर्माण नहीं हुआ। बारिश में सड़क पर इतना कीचड़ हो जाता है कि ट्रैक्टर और बैलगाड़ियों से कृषि उपज लाते समय वाहन फंस जाते हैं और कई बार पलटने से किसानों का माल भी खराब हो चुका है। ग्रामीणों ने बताया कि इस रास्ते से गुजरने वाले पांच गांवों के बच्चों को भी प्रतिदिन करीब तीन किलोमीटर पैदल चलकर कोंढी स्थित स्कूल पहुंचना पड़ता है, जहां उन्हें कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है।किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
स्थायी समाधान करने की आवश्यकता
परियोजना में मेरी अधिकांश जमीन चली गई है और बची हुई खेती तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। कई बार ट्रैक्टर में लाया गया कृषि उत्पाद कीचड़ में गिरकर खराब हो चुका है। ग्रामीण अपने खर्च से अस्थायी रूप से मुरूम डालकर रास्ता ठीक करते हैं, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं, ऐसे में प्रशासन को शीघ्र ही इस समस्या का स्थायी समाधान करना होगा।
-भाऊ कातोरे, स्थानीय किसान.





