– 199 रुपये शुल्क, टॉप-अप और डिजिटल प्रक्रिया बनी चुनौती
नागपुर :- महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एसटी) की बसों में शासन की रियायत पर यात्रा करने वाली महिलाओं और 65 से 75 वर्ष आयु वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1 सितंबर से ‘एनसीएमसी’ (राष्ट्रीय साझा गतिशीलता) स्मार्ट कार्ड के जरिए ही रियायती टिकट देने की व्यवस्था लागू की गई है। हालांकि, इस व्यवस्था से रियायत का लाभ लेने के बजाय महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के सामने नई परेशानियां खड़ी होने की बात कही जा रही है।
एसटी के एनसीएमसी स्मार्ट कार्ड के लिए शासन ने 199 रुपये शुल्क निर्धारित किया है। कार्ड के लिए पंजीकरण करते समय आधार सहित आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। कार्ड मिलने के बाद ही इसका उपयोग रियायती टिकट के लिए किया जा सकेगा। साथ ही कार्ड के वॉलेट में आवश्यक राशि टॉप-अप करके रखना भी जरूरी होगा। ऐसे में रियायत पाने के लिए पहले कार्ड बनवाना, उसके लिए शुल्क देना और फिर कार्ड में राशि उपलब्ध रखना होगा। सरकार द्वारा रियायत देने का उद्देश्य यात्रा का आर्थिक बोझ कम करना है, तो उस रियायत तक पहुंचने की प्रक्रिया कितनी खर्चीली और जटिल होनी चाहिए, यह सवाल उठ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी चुनौती
शहरी क्षेत्रों में डिजिटल लेन-देन के आदी यात्रियों के लिए स्मार्ट कार्ड की व्यवस्था सुविधाजनक हो सकती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अलग है। कई महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल लेन-देन की पर्याप्त जानकारी नहीं है। कुछ लोगों को मोबाइल पर आने वाले संदेश पढ़ने में भी परेशानी होती है, जबकि बैंकिंग और ऑनलाइन लेन-देन से भी कई लोग परिचित नहीं हैं। ऐसे में स्मार्ट कार्ड बनवाने, उसे सक्रिय करने, राशि भरने, बैलेंस जांचने और राशि खत्म होने पर दोबारा टॉप-अप करने के लिए उन्हें परिवार के सदस्यों या परिचितों की मदद लेनी पड़ सकती है। यानी रियायत संबंधित महिला या वरिष्ठ नागरिक के नाम पर होगी, लेकिन उसका इस्तेमाल करने के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
कार्ड नहीं मिला तो रियायत का क्या?
व्यवस्था को लेकर सबसे अहम सवाल यह है कि यदि पात्र यात्री के पास स्मार्ट कार्ड उपलब्ध नहीं है या कार्ड में पर्याप्त राशि नहीं है, तो उसे रियायत मिलेगी या नहीं? यदि पंजीकरण पूरा होने के बावजूद कार्ड प्राप्त नहीं हुआ, सक्रिय नहीं हुआ या टॉप-अप नहीं हो सका, तो पात्र यात्रियों को रियायत से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।डिजिटल प्रणाली रियायत तक पहुंचने का माध्यम होनी चाहिए, खुद रियायत पाने की अनिवार्य शर्त नहीं। इसलिए ऐसी स्थिति में यात्रियों के लिए स्पष्ट वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग उठ रही है।
बुजुर्गों के लिए अंगूठे का निशान भी बना अड़चन
एनसीएमसी स्मार्ट कार्ड के पंजीकरण के दौरान कुछ वरिष्ठ नागरिकों के फिंगरप्रिंट मशीन पर दर्ज नहीं होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इसके चलते कुछ बुजुर्गों को पंजीकरण के लिए संबंधित डिपो के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इन तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए 75 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को फिलहाल स्मार्ट कार्ड की अनिवार्यता से बाहर रखा गया है। इससे एक अहम सवाल सामने आता है,तकनीक लोगों की सुविधा के लिए है या लोगों को तकनीक की शर्तों के अनुसार ढालने के लिए?





