– 1344 मौतें, 5300 से अधिक लापता
काठमांडू :- नेपाल में 26 अगस्त से जारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच शुक्रवार को दार्चुला जिले में एक और बड़ा भूस्खलन हुआ। इसके कारण चौलानी नदी का प्रवाह बाधित हो गया। नदी का रास्ता रुकने से निचले इलाकों में खतरा बढ़ गया है, जिसके चलते प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है।
इस बीच, बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। त्रिशूली बाजार क्षेत्र से शुक्रवार को पांच साल के बच्चे समेत तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अब तक 169 भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि 275 भारतीय अभी भी लापता हैं।
नेपाल में 1344 लोगों की मौत :
नेपाल पुलिस के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन में अब तक 1344 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5300 से अधिक लोग लापता हैं। राहत एवं बचाव दलों ने करीब 12 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, आपदा से 32 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं, तिब्बत में भी 31 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।
चीन से 1907 भारतीय नेपाल पहुंचे :
विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीन से 1907 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। चीन के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में अब कोई भारतीय यात्री फंसा नहीं है।
भारत ने भेजी 95 टन राहत सामग्री :
भारत ने नेपाल में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए मदद तेज कर दी है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से भारत ने सात विमानों के जरिए करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त को नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से फोन पर बात कर हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया था। इसके कुछ घंटे बाद ही भारत ने राहत सामग्री की पहली खेप नेपाल भेज दी थी।
भारत ने राहत एवं बचाव अभियान में सहयोग के लिए 54 विशेषज्ञों की टीम भी नेपाल भेजी है। इसमें 30 सुरंग बचाव विशेषज्ञ, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और पांच सदस्यीय मेडिकल टीम शामिल है। भारतीय विशेषज्ञ नेपाल के अधिकारियों के साथ समन्वय कर राहत और बचाव कार्यों में जुटे हैं।
दार्चुला में बढ़ी चिंता
दार्चुला में भूस्खलन के बाद चौलानी नदी का प्रवाह प्रभावित होने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां नदी के जलस्तर तथा भूस्खलन की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।





