– राहुल गांधी-ओवैसी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिकाएं सूचीबद्ध
नई दिल्ली :- मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर) को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत 13 विपक्षी नेताओं की ओर से दायर याचिकाओं पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करेगी। इन याचिकाओं में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, फॉर्म-6 में किए गए बदलावों और एसआईआर से संबंधित निर्णयों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी याचिका पर भी सुनवाई होने की संभावना है। दिल्ली के जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। इन पर भी गुरुवार को सुनवाई होने की संभावना है। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और मेट्रो सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों से जुड़े मामले भी अदालत के समक्ष उठाए जा सकते हैं। इस बीच, आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करेगी। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में तिरंगा फहराने की घोषणा की है।
दिल्ली पुलिस पर अवैध हिरासत का आरोप
माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से दायर याचिकाओं के संदर्भ में कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अनुकूल निर्णय की उम्मीद है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया, घसीटकर वाहन में बैठाया और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने भी उन्हें परेशान किया।
ब्रिटास के अनुसार, उन्होंने इन घटनाओं की जानकारी देते हुए प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखा था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का आभार जताते हुए कहा कि अदालत ने उनके पत्र को अंतरिम याचिका के रूप में स्वीकार कर विपक्षी गठबंधन की पहले से लंबित याचिका के साथ जोड़ दिया है।
संविधान और सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा : प्रमोद तिवारी
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने दावा किया कि एसआईआर के नाम पर 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में वैध मतदाता भी शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला प्रभावित मतदाताओं के पक्ष में आता है, तो क्या पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में हो चुके चुनावों की स्थिति बदली जा सकेगी?
एसआईआर को लेकर विपक्षी नेताओं की याचिकाओं और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामलों की सुनवाई पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर रहेगी।








