– पर्यावरण संरक्षण में भी आगे आएं नागरिक, नाशिक में महाआरती के दौरान दिया संदेश
नाशिक :- महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति से जूझ रहे किसानों को सम्मानजनक सहायता उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार प्रयासरत हैं। वहीं, पर्यावरण संरक्षण भी समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसके लिए नागरिकों को स्वयं आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। यह आह्वान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया।
सिंहस्थ कुंभ मेले के धर्मध्वजारोहण समारोह के बाद शनिवार शाम रामकुंड परिसर में राष्ट्रपति मुर्मू की उपस्थिति में महागोदावरी आरती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, सुनेत्रा पवार, राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा सहित कई मंत्री और विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत उपस्थित थे।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन की शुरुआत मराठी में ‘नासिक नगरीला माझा नमस्कार’ कहकर की। उन्होंने नाशिक में धर्मध्वजारोहण का अवसर मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। साथ ही त्र्यंबकेश्वर में पूजा-अर्चना करने को भी सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होने के साथ ही भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और जीवन मूल्यों से जुड़ने का माध्यम है। यह आयोजन सामाजिक समरसता और एकता का संदेश देता है। महाराष्ट्र को अमृतभूमि और नाशिक को तपोभूमि बताते हुए उन्होंने साल्हेर किले और क्रांतिकारियों की स्मृतियों से जुड़े अभिनव भारत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नाशिक की धरती का देशप्रेम और राष्ट्रभक्ति के इतिहास में विशेष स्थान है।
कुंभ मेला शाश्वत मूल्यों की विरासत : फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सिंहस्थ कुंभ मेले के मद्देनजर नासिक और त्र्यंबकेश्वर में बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों से शहर का स्वरूप बदल रहा है और स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। कुंभ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और शाश्वत मूल्यों की विरासत है।
कुंभ मेले से लोगों को मिलेगा रोजगार : शिंदे
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सिंहस्थ कुंभ मेला ऐतिहासिक आयोजन है। राष्ट्रपति की उपस्थिति में धर्मध्वजारोहण समारोह संपन्न होना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि इस बार महिला शक्ति को भी विशेष स्थान मिला है। सनातन धर्म नारी शक्ति के सम्मान का संदेश देता है। शिंदे ने कहा कि कुंभ मेले के माध्यम से देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का दर्शन होगा। यह आयोजन केवल शहर के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और काम के अवसर भी मिलेंगे।








