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MPSC परीक्षा में गड़बड़ी, पहले ही लीक हुआ था मार्किंग पैटर्न!

<p><strong>&&num;8211&semi; 100 में 85 से 90 अंक पाने वाले उम्मीदवारों पर भी संदेह<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p><strong>नागपूर &colon;- <&sol;strong>महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग &lpar;एमपीएससी&rpar; की राज्य आबकारी विभाग के दुय्यम निरीक्षक &lpar;समूह-क&rpar; पद के लिए आयोजित परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि परीक्षा से पहले ही उसका मार्किंग पैटर्न लीक हो गया था। इस मामले की जांच में आबकारी विभाग के संयुक्त आयुक्त सहित कुछ अधिकारियों के दोषी पाए जाने की जानकारी सामने आई है। नवी मुंबई अपराध शाखा की जांच के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट आयोग को भेजे जाने की जानकारी नागपुर पुलिस की जांच में सामने आई है। इसके बावजूद आयोग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से उसकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।<&sol;p>&NewLine;<p>एमपीएससी परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों के लीक होने का आरोप लगाते हुए रवींद्र दिनकर इंगोले सहित 15 उम्मीदवारों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर नागपुर शहर पुलिस की अपराध शाखा ने जांच शुरू की। नागपुर पुलिस ने मामले की जानकारी के लिए नवी मुंबई अपराध शाखा से संपर्क किया। वहां से बताया गया कि शिकायत की जांच पूरी हो चुकी है और आबकारी विभाग के संयुक्त आयुक्त सहित कुछ अधिकारी दोषी पाए गए हैं। संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट एमपीएससी को भेजे जाने की जानकारी भी दी गई।<&sol;p>&NewLine;<p>इस बीच&comma; एमपीएससी ने 9 सितंबर 2026 को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मामले में अपना स्पष्टीकरण दिया था। हालांकि&comma; पुलिस जांच में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने के बावजूद आयोग ने परीक्षा की वैधता और आगे की कार्रवाई को लेकर कोई ठोस निर्णय घोषित नहीं किया है। इससे उम्मीदवारों के हितों और परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>गुणांकन प्रक्रिया पर भी सवाल<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>राज्य आबकारी विभाग में दुय्यम निरीक्षक के 137 पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा में कुल 953 उम्मीदवार शामिल हुए थे। परीक्षा से पहले ही मार्किंग पैटर्न लीक होने के आरोप ने पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष रूप से कुछ उम्मीदवारों को 100 में से 85 से 90 अंक मिलने के बाद उनके गुणांकन पर भी संदेह जताया जा रहा है। उम्मीदवारों का कहना है कि प्रश्नपत्र के कठिनाई स्तर और अंकों के स्वरूप को देखते हुए इतने अधिक अंक मिलने की संभावना की भी जांच होनी चाहिए।<&sol;p>&NewLine;<p>अब सवाल यह है कि पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आयोग संबंधित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है और इस परीक्षा के भविष्य को लेकर क्या निर्णय लेता है।<&sol;p>&NewLine;