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वित्त विभाग के सर्वेक्षण में बड़ा खुलासा,’लाडली बहिन’ से राज्य के खस्ताहाल

मुंबई :- महाराष्ट्र सरकार की ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन’ (लाडली बहन) जैसी लोकलुभावन योजनाओं और बढ़ते कर्ज के बोझ से राज्य की वित्तीय स्थिति खस्ताहाल होने लगी है. राज्य सरकार के आय-व्यय का गणित पूरी तरह बिगड़ने के कारण चालू वित्तीय वर्ष के बजट प्रावधानों में 5 से 20 प्रतिशत तक की भारी कटौती करनी पड़ी है. वित्त विभाग ने 29 जनवरी को इस संबंध में शासकीय परिपत्र जारी किया था. चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में बजट में निधि वितरण पर कैंची चलाई गई है. कार्यालय खर्च, हथियार-गोला-बारूद, ओवरटाइम और मशीनरी रखरखाव जैसे मदों में कटौती की गई है. राज्य के वर्ष 2025-26 के बजट में 45,891 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा अनुमानित किया गया था. इसके बावजूद बारिश और शीतकालीन सत्र में हजारों करोड़ रुपए की पूरक मांगें मंजूर की गईं. इससे सरकार की राजस्व आय और व्यय का अनुमान पूरी तरह ध्वस्त हो गया है. नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में मात्र दो महीने शेष रहते हुए सरकार को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा.

वित्त विभाग के निर्णय के अनुसार कर्मचारियों के वेतन के लिए निधि वितरण की सीमा 95 प्रतिशत निर्धारित की गई है. यानी पांच प्रतिशत की कटौती की गई है. यह कदम राज्य की गंभीर वित्तीय स्थिति को दर्शाता है. टेलीफोन, बिजली और पानी के बिल, कार्यालय खर्च, किराया-कर, पेट्रोल-स्नेहक तेल, व्यावसायिक सेवाएं तथा मशीनरी-उपकरणों के रखरखाव एवं मरम्मत के लिए केवल 80 प्रतिशत निधि वितरित की जाएगी. इसका मतलब है कि इन मदों में 20% की भारी कटौती की गई है. मजदूरी और ठेका सेवा के खर्च में 10 प्रतिशत की कमी की गई है.

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