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इंजीनियरिंग छात्रा ने की आत्महत्या

नागपुर :- प्रथम वर्ष की इंजीनियरिंग छात्रा ने कामठी फ्लाईओवर से कूदकर आत्महत्या कर ली.कूदने वाली छात्रा का नाम श्रीना गडपायले (18) है. यह चौंकाने वाली घटना गुरुवार रात करीब 9 बजे व्हाइट हाउस के सामने कामठी रोड पर घटी. पांचपावली पुलिस ने इस मामले में तत्काल आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया है. शिकायतकर्ता कामठी रोड निवासी आशीष गडपायले (51) हैं. पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आशीष का एक टूर एंड ट्रैवल ऑफिस है.उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी है. श्रीना इंजीनियरिंग प्रथम वर्ष की छात्रा थीं. वह गुरुवार रात घर से निकली थीं. कामठी फ्लाईओवर पर गई. कुछ ही पलों में उसने पुल से छलांग लगा दी. जैसे ही वह गिरी, आस-पास के लोग दौड़ पड़े. उसे पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसी बीच, किसी ने श्रीना के पिता को फोन करके सूचना दी. वे कुछ ही समय में अस्पताल पहुंच गए. श्रीना को अंदरूनी चोटें आई हैं और उसकी हालत गंभीर है. डॉक्टरों से यह सूचना मिलने पर वे घायल कोराडी मार्ग स्थित अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

आत्महत्या जैसा कठोर निर्णय कोई भी एक दिन में नहीं लेता. यह एक प्रक्रिया है. इस दौरान, यदि कोई व्यक्ति परामर्श दे, तो आत्महत्या करने वाला व्यक्ति अपना निर्णय बदल सकता है. इसलिए, माता-पिता, बच्चों के मित्र बनें. उनके साथ दोस्तों जैसा व्यवहार करें, समय-समय पर उनसे सवाल पूछें. उन पर अपेक्षाओं का बोझ न डालें. गुस्से को एक तरफ रखकर खुलकर चर्चा करें. समस्याओं को समझें. इससे बच्चे के मन का तनाव कम होगा और वह सकारात्मक सोचेगा, ऐसा प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सूचित बागडे ने कहा. उन्होंने कहा कि आत्महत्या से समस्याएं हल हो जाती हैं, यह एक गलत धारणा है. इसके विपरीत, समस्याएं और भी गंभीर हो जाती हैं. आत्महत्या का विचार तो चला जाता है, लेकिन उसके पीछे कई सवाल खड़े हो जाते हैं, जिनके जवाब परिवार को देना संभव नहीं होता. डॉ. बागडे ने कहा कि, अगर ऐसा विचार मन में आए भी, तो बच्चा आत्महत्या करने से बच सकता है.


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