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हिंगना एमआईडीसी के जल शोधन केंद्र में आधुनिक तकनीक

– अंबाझरी के प्रदूषण पर ‘नैनो बबल्स’ का प्रयोग

 नागपुर :- विदर्भ का औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों को अब स्वच्छ और बेहतर गुणवत्ता वाला जल मिलेगा. जल प्रदूषण की समस्या को दूर करने के लिए, औद्योगिक विकास निगम ने ‘नैनो टाइम-असिस्टेड एडहेजन’ नामक आधुनिक तकनीक का सफलतापूर्वक प्रयोग किया है.

अंबाझरी तालाब झील हिंगना स्थित 13.5 मिलियन लीटर (एमएलडी) क्षमता वाले जल शोधन संयंत्र का मुख्य स्रोत है. हालांकिवाडी और आसपास के क्षेत्रों से निकलने वाले सीवेज के तालाब में मिल जाने के कारण पानी की गुणवत्ता खराब हो गई थी. एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पी. मोहन की शिकायत के अनुसार, इससे उद्योगों में मशीनरी में जंग लग रही थी, पाइपलाइनों में स्केलिंग हो रही थी और उत्पादों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी. जब पारंपरिक उपचार विधियां विफल हो गईं, तो एमआईडीसी ने तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह से नए कदम उठाए. जल शोधन संयंत्र की दीवारों को नैनो बबल्स से उपचारित किया गया.

वाष्प पूरी तरह से समाप्त हो गई है. प्रति माह एक टन से अधिक कार्बन निकाला जा रहा है. कार्बन का स्तर अब 7 पीपीएम से घटकर मात्र 2 पीपीएम रह गया है, और उप-उत्पादों का खतरा पूरी तरह से खत्म हो गया है. ‘एफएल 452०’ और ‘एएन 934’ जैसे आधुनिक रसायनों के उपयोग से जमा हुए गाद को निकालना आसान हो गया है.

इन बदलावों से पानी की दुर्गंध कम हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है. इससे विशेष रूप से दवा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बहुत लाभ होगा. मुख्य अभियंता राजेश झांझड़, कार्यकारी अभियंता शशिकांत पाटिल और उप अभियंता संजय कुमार गौर के मार्गदर्शन में इन परीक्षणों की सफल योजना बनाई गई. माना जा रहा है कि हिंगना औद्योगिक क्षेत्र भविष्य में सतत जल प्रबंधन के लिए एक आदर्श के रूप में उभर रहा है.


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