– एक किलोमीटर का नियम बना अभिभावकों की चिंता का कारण
पुणे :- शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत 25% आरक्षित सीटों के लिए ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया संचालित की जा रही है। हालांकि, पिछले साल की तुलना में इस साल एडमिशन को कम प्रतिसाद मिल रहा है। फरवरी समाप्त होने को है, फिर भी अभी तक एडमिशन क्षमता से अधिक आवेदन प्राप्त नहीं हुए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा आरटीई प्रवेश नियमों में किए गए विसंगतिपूर्ण बदलाव के कारण अभिभावकों इस बार प्रवेश प्रक्रिया में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं।
राज्य के 8,651 स्कूलों में कुल 1,12,772 सीटों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आरटीई प्रवेश के आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। प्रवेश आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 10 मार्च निर्धारित की गई है। 25 फरवरी तक 90,000 विद्यार्थियों के आवेदन प्राप्त हुए हैं। अमरावती और नागपुर जिलों को छोड़कर किसी भी जिले में प्रवेश क्षमता से अधिक आवेदन प्राप्त नहीं हुए हैं। हर साल पुणे जिले से आरटीई प्रवेश के लिए सबसे ज्यादा आवेदन प्राप्त होते हैं। इस साल पुणे जिले के 905 स्कूलों में 17,509 सीटों के लिए केवल 17,000 आवेदन ही प्राप्त हुए हैं।
राज्य स्कूल शिक्षा विभाग ने आरटीई प्रवेश नियमों में बदलाव किया है। पहले विद्यार्थियों को घर से तीन किलोमीटर की दूरी तक स्थित स्कूलों में आवेदन की अनुमति थी, लेकिन इस साल नियम में बदलाव कर उसे घटाकर केवल एक किलोमीटर कर दिया गया है। कई क्षेत्रों में घर से एक किलोमीटर की दूरी पर कोई स्कूल उपलब्ध नहीं है, जिससे विद्यार्थियों के प्रवेश से वंचित रहने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
नगर पालिका, महानगर पालिका और अन्य स्थानीय स्वशासन संस्थाओं द्वारा संचालित स्कूलों में लगभग 50% से ज्यादा आरक्षित सीटों पर प्रवेश दिया जाता है। साथ ही, अधिकांश स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने के कारण अभिभावक बच्चों का प्रवेश इन स्कूलों में कराने के इच्छुक नहीं हैं। ज्यादातर अभिभावक आरटीई के तहत अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में प्रवेश चाहते हैं, लेकिन घर संबंधी नियम के कारण वे चिंतित हैं, क्योंकि उनके घर के पास एक किलोमीटर के भीतर कोई भी अंग्रेजी माध्यम का स्कूल उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर रूप से सामने आई है।