भंडारा :- शिकार करो या शिकार बनो’ यह जंगल में जाने वाले इंसानों और जानवरों के लिए जीवन का नियम है. अगर आप शिकार नहीं कर सकते, तो आपको सुरक्षित रहने की कला सीखनी होगी. नहीं तो आप सुरक्षित नहीं रहेंगे. ऐसी ही एक भयानक स्थिति भंडारा के पेवठा गांव और उसके आसपास के इलाकों में दिखाई दे रही है . पिछले कुछ दिनों से गांव में बाघ को लेकर नागरिकों में भय का माहौल है.
भंडारा जिले में बाघ खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं और जंगली जानवर जंगल से इंसानी बस्तियों में घुसते नजर आ रहे हैं. इस वजह से भंडारा जिले में शिकार की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. भंडारा के ऑर्डनेंस फैक्ट्री, भंडारा के सुरक्षा दीवार क्षेत्र में स्थित पेवठा गांव में एक बाघ ने एक महीने के अंदर 15-15 दिनों के अंतर पर एक गाय और एक बैल का शिकार किया है.
इसमें परसराम मेश्राम की गाय और सोमजी वंजारी के बैल का शिकार होने से गांव में डर का माहौल बन गया है. तो, जब बाघ ने दो जानवरों का शिकार किया है, तो क्या बाघ तीसरा विकेट लेकर हैट्रिक लगाएगा? यह सवाल उठ रहा है और नागरिकों में गुस्सा है. हालांकि वन विभाग ने बाघ को पकडऩे के लिए ट्रैप कैमरे और पिंजरे लगाए हैं, लेकिन बाघ वन विभाग की सारी कोशिशों को नाकाम कर रहा है. हालांकि गांव वाले हर दिन बाघ को देख रहे हैं, डर का माहौल बन गया है, लेकिन दिन में भी नागरिक खेतों में जाने से डर रहे हैं, जिससे खेतों में किसानों का काम रुका हुआ है और चना, अरहर, लखौरी, कपास कटाई के लिए आए हैं, लेकिन बाघ के डर से मजदूर भी खेतों में नहीं जा रहे हैं, इसलिए किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. पेवठा इलाके में दो बाघों के शिकार के बाद डर का माहौल फैल गया है और महिला मजदूर भी खेतों में जाने की हिम्मत कर रही हैं, वहीं महिलाएं एक-दूसरे की हिम्मत से मजदूरी के लिए जा रही हैं. चूंकि पास की ऑर्डनेंस फैक्ट्री भंडारा के कर्मचारी भी कोंडी, पेवठा, लोहारा, सालेबर्डी गांवों में रहते हैं, इसलिए रात की शिफ्ट में काम पर जाते समय कर्मचारियों में डर का माहौल बन गया है. खास बात यह है कि वन विभाग से मांग की जा रही है कि वह तुरंत बाघ का ध्यान रखे और जिन किसानों का नुकसान हुआ है उन्हें मुआवजा दे और तुरंत व्यवस्था करे…!




