– सत्र अदालत ने दी राहत, ट्रायल रहेगा जारी
नागपुर :- नागपुर की एक सत्र अदालत ने कथित दुष्कर्म एवं ब्लैकमेल मामले में गिरफ्तार एक सरकारी प्राध्यापक को नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल जमानत से संबंधित है और इससे मामले के गुण-दोष अथवा आरोपी की दोषसिद्धि या निर्दोषता पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। मामले का ट्रायल कानून के अनुसार जारी रहेगा।
कलमना पुलिस थाना में दर्ज अपराध के तहत आरोपी को 23 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सत्र न्यायालय ने 7 जुलाई 2026 को उसे नियमित जमानत प्रदान की। प्राथमिकी (एफआईआर) के अनुसार, शिकायतकर्ता, जो एक सरकारी कर्मचारी हैं, ने आरोप लगाया है कि लगभग दो वर्षों तक उनके साथ बार-बार दुष्कर्म किया गया तथा उन्हें धमकाकर ब्लैकमेल किया गया। वहीं, जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच लगभग 25 महीनों तक आपसी सहमति से संबंध रहे और इस अवधि में किसी भी स्तर पर पुलिस या अन्य प्राधिकरण के समक्ष कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि शिकायत शिकायतकर्ता के पति को कथित संबंधों की जानकारी मिलने के बाद दर्ज कराई गई। साथ ही, एफआईआर के अनुसार दोनों के बीच संपर्क मार्च 2026 में समाप्त हो गया था, जबकि शिकायत जून 2026 में दर्ज हुई। बचाव पक्ष ने इस समयांतराल को जमानत पर विचार के लिए महत्वपूर्ण बताया।बचाव पक्ष के अनुसार, जांच एजेंसी आरोपी का मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पहले ही जब्त कर चुकी है, जिनमें कथित रूप से फोटो, वीडियो और इलेक्ट्रॉनिक संवाद मौजूद हैं। ऐसे में सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं होने का तर्क भी अदालत के समक्ष रखा गया।जमानत याचिका में लंबे समय तक चले सहमति-आधारित संबंधों से जुड़े मामलों पर हाल के न्यायिक निर्णयों का भी उल्लेख किया गया।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सत्र न्यायालय ने निर्धारित शर्तों के साथ आरोपी को नियमित जमानत दे दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल जमानत तक सीमित है और इससे मामले के अंतिम निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।इस मामले में आरोपी की ओर से द एजिस लॉ ग्रुप, नागपुर के प्रबंध साझेदार अधिवक्ता मुनीश आर. पेरके के नेतृत्व में अधिवक्ता मानसी बंसोड, अधिवक्ता सैयद शोएब अली, अधिवक्ता हेमांक गढ़िया, अधिवक्ता स्पर्श भोंडेकर, हर्षिता श्रीवास्तव एवं कार्तिक ठाकुर ने पैरवी की।अब मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में होगी, जहां अभियोजन पक्ष एफआईआर में लगाए गए आरोपों को सिद्ध करने का प्रयास करेगा, जबकि बचाव पक्ष अपने पक्ष में प्रस्तुत तर्कों के आधार पर आरोपों का खंडन करेगा।




