भक्ति और स्वास्थ्य का संतुलन ही जीवन की सच्ची सफलता – डॉ. डबली

0
54
Oplus_16908288
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज विश्वविद्यालय के औषधि विभाग में “सर्वज्ञ 2025” का भव्य आयोजन
नागपुर ३० : राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के औषधि विभाग द्वारा डॉ. ए. के. डोरले ऑडिटोरियम में “सर्वज्ञ 2025” अंतर्गत गणेश उत्सव का भव्य उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में नैचुरोपैथी व नियोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण डबली तथा पंढरपुर वारी से लौटे काटोल के वारकरी विजय डोंगरे महाराज उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रो. डॉ. दादासाहेब कोकरे, डॉ. राजेंद्र काकडे (विभाग प्रमुख), डॉ. प्रकाश इटनकर (पीएसए शिक्षक प्रभारी), ओम मेंढे (गणेशोत्सव महासचिव), आशीष अंबुले (फार्मेसी स्टूडेंट एसोसिएशन अध्यक्ष), योगेश निकम तथा धनंजय गिराम सहित बड़ी संख्या में बी.फार्म, एम.फार्म व पीएच.डी. विद्यार्थी उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत बी.फार्म विद्यार्थियों द्वारा भक्त पुंडलिक की कहानी पर आधारित नाट्य प्रस्तुति से हुई। इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि आधुनिक तकनीक के युग में भी माता-पिता का सम्मान व ईश्वर की भक्ति सर्वोपरि है।
विजय डोंगरे महाराज ने वारी परंपरा व पांडुरंग भक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान और अध्यात्म का संगम ही जीवन को दिशा देता है।
मुख्य अतिथि डॉ. प्रवीण डबली ने अपने प्रेरक मार्गदर्शन में अभंग की परंपरा और गणपति बप्पा के स्वरूप को स्वास्थ्य से जोड़ते हुए कहा – “भक्ति और स्वास्थ्य का संतुलन ही जीवन की सच्ची सफलता है। वारकरी परंपरा के अभंग केवल श्रद्धा के गीत नहीं, बल्कि शरीर व मन को संतुलन देने वाले अमृत स्वर हैं।”
उन्होंने बताया कि वारकरी सामूहिक रूप से “विठ्ठल-विठ्ठल” नामस्मरण करते समय रीढ़ सीधी, चाल संतुलित और श्वास लयबद्ध रखते हैं। यही सही “पोस्चर” का आदर्श उदाहरण है।
डॉ. डबली ने आगे कहा कि जैसे अभंग में स्वर, ताल और लय का संतुलन होता है, वैसे ही हमें अपने आसन व जीवनशैली में संतुलन लाना चाहिए। गलत पोस्चर धीरे-धीरे स्वास्थ्य को खोखला कर देता है, जबकि सही आसन मन को शांति और शरीर को स्थिरता प्रदान करता है।
उन्होंने आह्वान किया कि इस गणेशोत्सव पर हम सब सही पोस्चर, संतुलित जीवनशैली और अभंग की भक्ति का संकल्प लें।