चंद्रपुर :- चंद्रपुर महानगर पालिका में महापौर और उपमहापौर पद पर कब्जा जमाने के बाद, जीत का जश्न अब ‘श्रेयवाद’ की लड़ाई में तब्दील हो गया है। भाजपा और शिवसेना (UBT) गठबंधन की इस जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा, इसे लेकर जिले के दो दिग्गज नेताओं के बीच तलवारें खिंच गई हैं। एक तरफ जहां सुधीर मुनगंटीवार को ‘किंगमेकर’ बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ विधायक किशोर जोरगेवार ने उन पर तीखा हमला बोला है।
मुनगंटीवार के पोस्टर और ‘किंगमेकर’ का खिताब
महापौर पद के चुनाव नतीजे घोषित होते ही चंद्रपुर के गांधी चौक पर जश्न का माहौल दिखा। भारी आतिशबाजी और ढोल-ताशों के बीच भाजपा कार्यकर्ताओं ने पूरे शहर में सुधीर मुनगंटीवार के पोस्टर लगा दिए। इन पोस्टरों में मुनगंटीवार को इस जीत का असली सूत्रधार और ‘किंगमेकर’ घोषित किया गया। भाजपा विधायक देवराव भोंगले ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि मुनगंटीवार के अनुभव और सटीक रणनीति के कारण ही यह ‘असंभव’ जीत मुमकिन हो पाई है।
किशोर जोरगेवार का पलटवार: “लेबल लगाने की राजनीति”
जीत के इस जश्न के बीच विधायक किशोर जोरगेवार के तीखे बयानों ने राजनीतिक पारे को गरमा दिया है। मुनगंटीवार पर निशाना साधते हुए जोरगेवार ने कहा:
“हर उपलब्धि पर अपना लेबल लगाने की कोशिश की जा रही है। अगर हर जीत का श्रेय रणनीतिकारों को जाता है, तो हार की जिम्मेदारी कौन लेगा?”
जोरगेवार ने मूल नगर पालिका का उदाहरण देते हुए मुनगंटीवार की घेराबंदी की। उन्होंने सवाल उठाया कि, “मूल नगर पालिका में तो मुनगंटीवार खुद ‘वन मैन शो’ थे, फिर भी वहां भाजपा की केवल दो सीटें क्यों आईं? वहां हार क्यों हुई?”
अंतर्कलह आई सामने
इस श्रेय युद्ध ने भाजपा के भीतर चल रही गुटबाजी को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। जानकारों का मानना है कि महानगर पालिका की यह सत्ता भले ही गठबंधन को मिल गई हो, लेकिन आगामी चुनावों से पहले नेताओं के बीच का यह मनमुटाव पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।




