– बर्तनों से लेकर घरेलू उपकरणों तक पर असर, इलाज का खर्च भी बढ़ा
नागपुर :- गोधनी जलशोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) में हुए क्लोरीन गैस रिसाव का असर अब भी साकार नगर के फागोजी पाटिल लेआउट स्थित घरों में दिखाई दे रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, गैस के प्रभाव से घरों में रखे बर्तन काले पड़ गए, दरवाजों के हैंडल का रंग बदल गया तथा फ्रिज, चिमनी और अन्य घरेलू सामान प्रभावित हुए। घरों के आसपास लगे पौधे भी मुरझा गए।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि घरों की गहन सफाई के लिए उन्हें करीब 20 हजार रुपए तक खर्च करने पड़े। इसके अलावा पर्दे और अन्य प्रभावित घरेलू सामान को भी बदलना पड़ा। स्थानीय निवासी ज्योति खराटे ने बताया कि उनके परिवार ने क्लोरीन प्रभावित कमरों की प्रोफेशनल डीप क्लीनिंग कराई। उन्होंने बताया कि फेफड़ों से संबंधित स्वास्थ्य समस्या के चलते परिवार ने विशेष रूप से घर की सफाई कराई। वहीं, रुपाली पाटिल के अनुसार, गोधनी नगर पंचायत की ओर से भी बर्तन साफ करने के लिए कर्मचारियों की मदद उपलब्ध कराई गई।

इलाज का खर्च भी बढ़ा
रिसाव की घटना के बाद प्रभावित परिवारों पर चिकित्सा खर्च का बोझ भी पड़ा है। निवासी हरीश पाटिल के अनुसार, उनके परिवार को इलाज पर करीब 1.40 लाख रुपए खर्च करने पड़े। निवासियों का आरोप है कि जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद द्वारा क्लोरीन रिसाव से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए शुल्क नहीं लेने के निर्देश दिए जाने के बावजूद कुछ निजी अस्पतालों में बिल बढ़ते रहे। इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। निवासियों के अनुसार, गैस रिसाव के बाद 59 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें से 50 से अधिक लोगों को उपचार के बाद छुट्टी मिल चुकी है, जबकि चार मरीज अब भी आईसीयू में उपचाररत बताए जा रहे हैं।
पालतू जानवर भी प्रभावित:
क्लोरीन गैस के प्रभाव से पालतू जानवरों के प्रभावित होने की बात भी सामने आई है। हरीश पाटिल ने बताया कि उनके पालतू खरगोश की आंखों में परेशानी हुई है और पशु चिकित्सक ने उसे सर्जरी की सलाह दी है।
संयंत्र को रिहायशी क्षेत्र से हटाने की मांग:
स्थानीय निवासियों ने घरों और घरेलू सामान को हुए नुकसान के लिए मुआवजा देने तथा उपचार पर हुए खर्च की भरपाई की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने गोधनी जलशोधन संयंत्र को रिहायशी क्षेत्र से अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग दोहराई है। ज्योति खराटे ने कहा कि रिहायशी क्षेत्र में डब्ल्यूटीपी के संचालन का स्थानीय स्तर पर पुरजोर विरोध किया जाएगा। उनका कहना है कि घटना ने रिहायशी इलाके के पास क्लोरीन जैसी गैस के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम को सामने ला दिया है।
स्थानीय निवासी श्याम इनामदार ने आरोप लगाया कि रिहायशी क्षेत्र में संयंत्र स्थापित करने की अनुमति देने के लिए नगर पंचायत और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (एमजेपी) की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। स्थानीय लोगों ने जलशोधन संयंत्र से जुड़े निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ओवरहेड टैंक और पाइप लाइन के निर्माण में खामियां हैं, जिसके कारण व्यवस्था पूरी तरह संचालित नहीं हो पा रही है। इन आरोपों की भी संबंधित विभागों से आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
900 किलो के टैंक से हुआ था रिसाव
23 औ र 24 अगस्त की दरमियानी रात गोधनी जलशोधन संयंत्र में 900 किलोग्राम क्षमता का क्लोरीन टैंक से गैस का रिसाव हुआ था। गैस आसपास के रिहायशी क्षेत्र की ओर फैलने के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों ने स्थिति को नियंत्रित किया था। हालांकि, घटना के कई दिन बाद भी प्रभावित परिवारों के घरों और सामान पर इसके असर के निशान दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय नागरिक अब नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा, चिकित्सा खर्च की भरपाई और संयंत्र की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं।





