– अनुदान रुका, जेब से चल रहा मिड डे मील
– प्रधानमंत्री पोषण योजना की राशि लंबित, मुख्याध्यापक आर्थिक दबाव में
नागपुर :- सरकारी और अनुदानित स्कूलों में पहली से 8वीं तक के विद्यार्थियों को दिए जाने वाले मध्यान्ह भोजन की प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना का अनुदान पिछले 4 महीनों से लंबित है. नवंबर से ईंधन, सब्जी और पूरक आहार के खर्च की प्रतिपूर्ति नहीं मिलने के कारण मुख्याध्यापकों को यह खर्च अपनी जेब से उठाना पड़ रहा है. इससे मुख्याध्यापकों में भारी असंतोष व्याप्त है. स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं तथा अनुदानित स्कूलों में इस योजना के अंतर्गत प्रतिदिन विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जाता है. योजना के तहत अनाज एवं खाद्यान्न सामग्री सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन ईंधन, सब्जी और पूरक आहार का खर्च विद्यालय प्रबंधन समिति को माह के अंत में दिया जाता है. योजना के अनुसार पहली से पांचवीं तक प्रति विद्यार्थी 2.59 रुपये तथा कक्षा 6 से 8 तक 3.88 रुपये का अनुदान निर्धारित है किंतु शासन से अनुदान प्राप्त होने तक यह पूरा खर्च मुख्याध्यापकों को अग्रिम रूप से वहन करना पड़ता है. पिछले चार महीनों से अनुदान नहीं मिलने के कारण कई स्कूलों के मुख्याध्यापक आर्थिक दबाव में हैं और उन्होंने नाराजगी व्यक्त की है. गत वर्ष तीन महीनों की अग्रिम निधि विद्यालय प्रबंधन समितियों को उपलब्ध कराई गयी थी, जिससे योजना सुचारु रूप से संचालित हो सकी थी, इस वर्ष भी अग्रिम राशि मिलने की अपेक्षा थी, किंतु न तो अग्रिम निधि जारी की गई और न ही मासिक खर्च का भुगतान हुआ. पिछले 2 वर्षों से योजना के तहत सप्ताह में एक दिन विद्यार्थियों को अंडा अथवा केला दिए जाने की व्यवस्था थी, लेकिन इस वर्ष यह प्रावधान भी लागू नहीं किया गया, जिससे विद्यार्थियों को मिलने वाला पौषण प्रभावित हो रहा है. मुख्याध्यापकों ने शासन से शीघ्र लंबित अनुदान जारी करने की मांग की है, ताकि योजना का संचालन बिना बाधा जारी रह सके और विद्यार्थियों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन मिल सके. नवंबर महीने से ईंधन, सब्जी और पूरक आहार के खर्च की प्रतिपूर्ति नहीं होने के कारण कई स्कूलों के मुख्याध्यापकों को यह खर्च अपनी जेब से उठाना पड़ रहा है। इससे शिक्षकों और मुख्याध्यापकों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार, योजना के तहत विद्यार्थियों को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए स्कूलों को शासन की ओर से अनुदान दिया जाता है। इस राशि से गैस सिलेंडर, सब्जियां, दाल, मसाले और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदी जाती है। लेकिन पिछले चार महीनों से अनुदान जारी नहीं होने से स्कूलों की आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
बच्चों का भोजन जारी रखने को मजबूर, खुद खर्च उठा रहे स्कूल
कई मुख्याध्यापकों का कहना है कि बच्चों का भोजन बंद नहीं किया जा सकता, इसलिए मजबूरी में वे खुद ही खर्च वहन कर रहे हैं। कुछ स्कूलों में शिक्षकों ने आपस में योगदान करके व्यवस्था संभाली है। हालांकि लंबे समय तक यह स्थिति बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। शिक्षक संगठनों ने प्रशासन से जल्द से जल्द लंबित अनुदान जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर निधि उपलब्ध नहीं कराई गई तो स्कूलों के लिए योजना को सुचारू रूप से चलाना कठिन हो जाएगा। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अनुदान जारी करने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही स्कूलों को बकाया राशि उपलब्ध करा दी जाएगी।