– नागपुर की सड़कों पर ‘नियम’ नहीं, ई-रिक्शा का मनमानी राज
– मेट्रो-बस फेल, ई-रिक्शा हिट: शहर बना ‘लास्ट माइल जाम’
नागपुर :- सड़कों पर इन दिनों ‘नियम’ नहीं बल्कि ‘नाराजगी’ दौड़ रही है. शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ई-रिक्शा के हाथों बंधक बन चुकी है. आलम यह है कि शहर के कोर एरिया से लेकर नेशनल हाईवे तक ई-रिक्शा चालकों की मनमानी चरम पर है. स्थिति बिगड़ती देख भी प्रशासन लाचार खड़ा है और जनप्रतिनिधि वोट बैंक के डर से इस मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं. करोड़ों रुपये की लागत से बनी मेट्रो, सिटी बस (आपली बस) और पारंपरिक ऑटो रिक्शा भी इस अव्यवस्था के आगे सरेंडर कर चुके हैं. ई-रिक्शा चालक कहीं भी बस स्टॉप पर कब्जा कर लेते हैं जिससे सिटी बसें बीच सड़क पर रुकने को मजबूर हैं. मेट्रो स्टेशनों के नीचे ई-रिक्शा की अनियंत्रित भीड़ ने ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ के सपने को ‘लास्ट माइल ट्रैफिक जाम’ में बदल दिया है. नियमों के मुताबिक ई-रिक्शा को मुख्य हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों के बीच चलने की अनुमति सीमित है लेकिन नागपुर में ये धड़ल्ले से भारी वाहनों के बीच दौड़ रहे हैं. बिना इंडिकेटर मुड़ना और ओवरलोडिंग के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं. शहर की आम जनता ट्रैफिक जाम में अपना कीमती समय और तेल जला रही है. लोगों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि टैक्स भरने के बावजूद उन्हें सुगम सड़के नहीं मिल रही है. सोशल मीडिया से लेकर चाय की टपरियों तक एक ही चर्चा है ‘जो ट्रैफिक सुधारेगा, वहीं वोट पाएगा.
प्रशासन पस्त , जनता त्रस्त
अगर जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आगामी चुनावों में ‘त्रस्त जनता’ अपनी उंगली (वोट) की ताकत से प्रशासन और नेताओं को सबक सिखाने के लिए तैयार बैठी है. शहर के सबसे व्यस्त व्यापारिक और रिहायशी इलाकों में ई-रिक्शा ने कहर बरपा रखा है. धंतोली और बर्डी अस्पतालों और बाजारों के इस केंद्र में ई-रिक्शा सडकों के बीचोबीच खड़े रहते हैं. एम्बुलेंस तक को रास्ता नहीं मिलता. इतवारी और महल संकरी गलियों में दर्जनों ई-रिक्शा एक साथ घुसने से घंटों जाम लगा रहता है. गणेशपेठ और रेलवे स्टेशन यात्रियों को ढोने की होड़ में ये रिक्शा मुख्य गेट पर ही जमावड़ा लगा लेते हैं जिससे सामान्य यातायात ठप हो जाता है. कॉटन मार्केट और सेंट्रल एवेन्यू यहां लोडिग और सवारी ई-रिवशा ने सडकों को पार्किंग लॉट में तब्दील कर दिया है.




