spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

डिजिटल शिक्षा और एआई की बात, लेकिन स्कूलों में बिजली ही नहीं

– बिल बकाया, 200 से ज्यादा स्कूलों पर अंधेरे का खतरा

– महावितरण ने काटी सौ से ज्यादा स्कूलों की लाइट, कई अब भी बिना ऑडिट

नागपुर :- जिला परिषद में महावितरण बिलों का भुगतान न करने वाले विद्यालयों की संख्या बढ़ गई है. बिलों का भुगतान न होने के कारण जिले के दो सौ से अधिक विद्यालयों में किसी भी क्षण बिजली गुल हो सकती है. शिक्षा विभाग के पास जानकारी है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद बिलों का भुगतान न होने के कारण सौ से अधिक विद्यालयों की बिजली आपूर्ति पहले ही काटी जा चुकी है. यह भी कहा जा रहा है कि यह संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है क्योंकि ऐसे विद्यालयों का ऑडिट नहीं होता है. इनमें से अधिकतर स्कूल दूरदराज के इलाकों में बताए जाते हैं. बिजली का बिल शिक्षा विभाग समग्र शिक्षा अभियान के माध्यम से अनुदान प्रदान करके इस कमी को पूरा करने का प्रयास करता है. लेकिन यह अनुदान अपर्याप्त होने के कारण प्रश्न उठता है किइसे स्टेशनरी पर खर्च किया जाए या अन्य कार्यक्रमों को लागू किया जाए. इसी कारण प्रधानाध्यापक बिल का भुगतान नहीं कर पाते. इस समस्या के समाधान के रूप में कुछ विद्यालयों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए. इनका कार्य मेडा्र (महा अभि ऊर्जा) कंपनी द्वारा किया गया था.

सौर ऊर्जा संयंत्र लगे, पर रखरखाव नदारद: शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

हालांकि, रखरखाव और मरम्मत की कमी के कारण कुछ विद्यालयों में लगे संयंत्र खराब हो गए हैं. एक ओर जिले में कई डिजिटल पहल चल रही हैं. इस उपक्रम कार्यान्वयन हो रहा है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) शिक्षा की ओर शुरू हो चुकी है. लेकिन, सुविधा न होने पर बिना बिजली के इसे कैसे चलाया जाए? संबंधित प्रबंधन समितियों के सामने यही सवाल है. कुछ स्कूलों में पुरानी व्यवस्था एक साल से जर्जर पड़ी है. मेडा्र एक पारस्परिक सौर ऊर्जा एजेंसी है, लेकिन इसकी जानकारी प्रशासन को ही नही होती.


Click above on our news logo to access the Daily E_Newspaper.
For articles or advertisements, contact us at: dineshdamahe86@gmail.com.

Copyright Disclaimer: If Any Image, video or article belongs to its respective owner/creator. Full credit goes to the original creator. No copyright infringement intended.