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जिला न्यायालय की पार्किंग समस्या पर सख्त रुख

– हाईकोर्ट ने नागपुर मनपा से पूछा- क्या नाले पर पार्किंग व्यवस्था बनाई जा सकती है?

नागपुर :- नागपुर जिला न्यायालय परिसर में दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही पार्किंग समस्या को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने नागपुर महानगरपालिका से सीधी पूछताछ की है। न्यायालय ने यह भी सवाल किया है कि क्या न्यायालय से सटे नाले पर पार्किंग की व्यवस्था की जा सकती है? क्या बहुमंजिला पार्किंग भवन के निर्माण पर विचार किया गया है? इस संबंध में विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के लिए महानगरपालिका को दो सप्ताह का समय दिया गया है। जिला वकील संघ के पूर्व सचिव एड. मनोज साबले ने जिला न्यायालय की विभिन्न आधारभूत सुविधाओं को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका पर गुरुवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान जिला वकील संघ के पूर्व अध्यक्ष एड. कमल सतुजा ने मध्यस्थी आवेदन दायर किया, जिसे व्यायालय ने स्वीकार कर लिया। एड. सेजल लाखानी के माध्यम से एड. सतुजा की ओर से पक्ष रखा गया। इस दौरान एड. लाखानी ने जिला न्यायालय परिसर की प्रमुख समस्याओं की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया।न्यायालय ने इस मुद्दे पर नागपुर महानगरपालिका (मनपा) से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि क्या न्यायालय परिसर से सटे नाले पर पार्किंग की वैकल्पिक व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि जिला न्यायालय में रोज़ाना बड़ी संख्या में वकील, पक्षकार और आम नागरिक आते हैं, लेकिन पर्याप्त पार्किंग सुविधा के अभाव में उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थिति यह है कि वाहन सड़कों पर बेतरतीब ढंग से खड़े किए जाते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है और दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मनपा को निर्देश दिए कि वह इस समस्या का स्थायी समाधान तलाशे और उपलब्ध विकल्पों पर गंभीरता से विचार करे। कोर्ट ने विशेष रूप से नाले के ऊपर डेक या संरचना बनाकर पार्किंग सुविधा विकसित करने की संभावना पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायालय परिसर जैसी संवेदनशील जगह पर अव्यवस्था किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। इस मामले में अगली सुनवाई तक मनपा को ठोस योजना के साथ जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

दैनिक कामकाज पर असर

उन्होंने न्यायालय परिसर में पार्किंग की भारी कमी, एंबुलेंस और अग्निशमन वहनों के आवागमन में आ रही बाधाएं तथा पार्किंग समस्या के कारण न्यायालय के दैनिक कामकाज पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को रेखांकित किया। इस पर न्यायालय ने पूछा कि क्या नाले पर पार्किंग की व्यवस्था संभव है। इस सवाल पर महानगरपालिका को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए। याचिकाकर्ता की ओर से एड. श्रीरंग भांडारकर और मनपा की ओर से एड. सुधीर पुराणिक ने पैरवी की।


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