“100 करोड़ रुपये से ज़्यादा टर्नओवर की लालच में, ट्रस्ट की मनमानी पर राज्य सरकार मौन।”
नागपुर 30 : नागपुर के प्रतिष्ठित और बहु-धार्मिक आस्था का केंद्र माने जाने वाले “हजरत बाबा ताजुद्दीन रह.अ.” की दरगाह में हर वर्ष मुहर्रम के बाद आयोजित होने वाला विशाल मेला पिछले दो सालों से एक संवेदनशील और विवादास्पद मुद्दा बन चुका है।
जहां यह मेला हर वर्ष लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है और 100 करोड़ रुपये से अधिक का धार्मिक-व्यापारिक टर्नओवर उत्पन्न करता है, वहीं पिछले दो सालों से इस मेले का आयोजन एक अवैध और कार्यकाल समाप्त समिति द्वारा किया जा रहा है- और राज्य सरकार एवं प्रशासन इस पर मौन साधे बैठे हैं।
मुख्य तथ्यः ताजाबाद ट्रस्ट की वर्तमान समिति का कार्यकाल 03 जून 2024 को समाप्त हो चुका है। उसके बाद यह समिति कानूनी रूप से अमान्य हो चुकी है।


इस समिति को नियम विरुद्ध कार्यकाल विस्तार मिला, जिसे लेकर दो विधिक आपत्तियाँ पहले ही धर्मादाय आयुक्त कार्यालय, नागपुर में दायर की जा चुकी हैं।
इसके बावजूद, यह समिति मेला आयोजन की तैयारी कर रही है, जो न केवल अवैध है बल्कि लाखों लोगों की जान जोखिम में डालने वाला कृत्य है।
गंभीर प्रश्नः क्या 10 लाख लोगों की सुरक्षा से बड़ा है 100 करोड़ का टर्नओवर?
क्यों राज्य सरकार अब तक इस अवैध समिति के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं कर रही?
क्या भविष्य में किसी हादसे की जिम्मेदारी खुद सरकार लेगी?
हमारी माँगः जब तक नयी, वैध और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से गठित समिति नहीं बनती, ताजाबाद मेले के आयोजन पर तत्काल रोक लगाई जाए।
यदि आयोजन करना अनिवार्य हो, तो वर्तमान अवैध समिति के सभी सदस्यों से ₹25 करोड़ की सुरक्षा राशि उनके व्यक्तिगत खातों से राज्य खजाने में जमा करवाई जाए।
महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री और गृह विभाग को इस पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए, वरना यह मामला न्यायालय, मानवाधिकार आयोग और मीडिया मंचों तक ले जाया जाएगा।
निष्कर्षः यह मामला अब केवल एक धार्मिक आयोजन का नहीं रहा, बल्कि यह जन सुरक्षा, कानूनी व्यवस्था और सरकारी जवाबदेही की अग्निपरीक्षा बन चुका है। यदि शासन अब भी चुप रहा, तो यह चुप्पी जनता के प्रति विश्वासघात मानी जाएगी। समाजसेवी नागपुर मुहम्मद वसीम, कांग्रेस नेता,




