निलंबन भी नहीं रोक पाया संघर्ष: गोसेखुर्द परियोजना पीड़ितों के लिए संसद की सीढ़ियों पर बैठे सांसद डॉ. प्रशांत पडोळे

0
51

हंसराज, प्रतिनिधी भंडारा, नई दिल्ली :- भंडारा-गोंदिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. प्रशांत पडोळे ने गोसेखुर्द बांध परियोजना के विस्थापितों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ दिल्ली में कड़ा रुख अख्तियार किया है। संसद सत्र से निलंबित होने के बावजूद, डॉ. पडोळे आज संसद भवन की सीढ़ियों पर धरने पर बैठ गए और शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराया।

गोसेखुर्द राष्ट्रीय परियोजना के कारण हजारों किसान, आदिवासी और स्थानीय नागरिक विस्थापित हुए हैं। कई दशक बीत जाने के बाद भी इन प्रकल्पग्रस्तों को न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही उनका सही ढंग से पुनर्वास हो सका है। रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में विस्थापित परिवार आज भी संघर्ष कर रहे हैं। इसी गंभीर मुद्दे की ओर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए डॉ. पडोळे ने संसद की सीढ़ियों को अपना विरोध स्थल बनाया।

“आवाज़ नहीं दबा सकती सरकार”

आंदोलन के दौरान डॉ. प्रशांत पडोळे ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “गोसेखुर्द प्रकल्पग्रस्तों का मुद्दा केवल एक क्षेत्र का नहीं, बल्कि विकास के नाम पर विस्थापित हुए उन हजारों लोगों की पीड़ा का प्रतीक है जिन्हें सरकार भूल चुकी है। भले ही मुझे सदन की कार्यवाही से निलंबित कर दिया गया हो, लेकिन जनता की आवाज़ उठाने से कोई नहीं रोक सकता। अन्याय के खिलाफ मेरा यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक हर पीड़ित को उसका हक नहीं मिल जाता।

सांसद ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें पुरजोर तरीके से रखीं:

🔹 प्रकल्पग्रस्तों के लिए तत्काल ‘विशेष आर्थिक पैकेज’ की घोषणा की जाए।

🔹 लंबित मुआवजे का भुगतान ब्याज सहित तुरंत किया जाए।

🔹 पुनर्वास स्थलों पर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की पुख्ता व्यवस्था हो।

डॉ. पडोळे के इस कदम ने गोसेखुर्द परियोजना के अटके हुए सवालों को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। संसद परिसर में उनके इस साहसपूर्ण विरोध की चर्चा राजनीतिक गलियारों में जोरों पर है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि किसी परिणाम की परवाह किए बिना सड़क से संसद तक लड़ने वाले लोकप्रतिनिधि के रूप में डॉ. पडोळे ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।