घर चलो’ के बाद ‘घर बैठाओ’: टिकट कटते ही पूर्व पार्षदों में बगावत के सुर

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– नए चेहरों की एंट्री से खुशी, पुराने दिग्गज नाराज़ : मनपा चुनाव में अग्निपरीक्षा

– उम्मीदवारों की सूची पर सस्पेंस : आख़िरी घड़ी तक नाम तय करती रहीं पार्टियाँ

नागपुर :- चुनाव प्रचार के लिए ‘घर चलो’ अभियान चलाने वाली प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने पिछली बार चुने गए पार्षदों के लिए ‘घर बैठाओ अभियान चलाया. भाजपा ने 1०8 पूर्व पार्षदों में से 64 को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने 29 पूर्व पार्षदों में से 25 को उम्मीदवार बनाकर नउ चेहरों को मौका दिया है. इससे नये लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है, वहीं पुराने पार्षद नाराजगी व्यक्त कर बगावत का झंडा बुलंद करने की तैयारी में जुट गए हैं. आठ साल बाद हो रहे मनपा चुनावों में राजनीतिक दलों ने उम्मीदवार तय करते करते समय अग्निपरीक्षा का सामना करना पड़ा. भाजपा ने नामांकन दाखिल करने से ठीक पहले अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए. कांग्रेस ने विद्रोह, धोडेबाजार और उम्मीदवारों को ले भागने का खतरा टालने के लिए अधिक समय लिया और नामांकन दाखिल करने के बाद अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित किए. फिर भी, विद्रोह का असर टल नहीं सका.

भाजपा ने टिकट कांटे प्रमुख पूर्व पार्षदों में मनपा के पूर्व सभापति अविनाश ठाकरे, नासुप्र के ट्रस्टी संजय बंगाले, पूर्व महापौर नंदा जिचकार, पूर्व सभापति प्रवीण भिसिकर, हरीश ग्वालबंसी, परिणिता फुके, प्रमोद कौरोती, पूर्व उपमहापौर दीपराज पार्डीकर, मनीषा कोठे, हरीश डिकोंडवार, स्वाति आखतकर, वंदना भगत, जयश्री वाडीभस्मे, पूर्व सभापति प्रकाश भोयर, प्रमोद तभाने आदि शामिल हैं.

वहीं, कांग्रेस ने नेहा निकोसे, मनोज सांगोले, संदीप सहारे, नीतीश ग्वालबंशी, दर्शनी धवड, हरीश ग्वालबंशी, कमलेश चौधरी, हर्षला साबले, पुरूषोत्तम हजारे जैसे प्रमुख नगरसेवकों के टिकट भी काटे. इसके कारण, निकोसे, धवड बीजेपी में शामिल हो गए, सांगोले एनसीपी (अजित पवार) में शामिल हो गए और सहारे वंचित में शामिल हो गए. चौधरी और हजारे ने निर्दलीय के रूप में अपनी उम्मीदवारी दाखिल की है.

भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही इस बार अपने उम्मीदवारों की सूची देरी से घोषित की है. दोनों पार्टियों ने नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि के बाद उम्मीदवारों की सूची जारी की. हालांकि, भाजपा सोमवार से ही कुछ उम्मीदवारों को फोन करके आवेदन जमा करने केलिए कह रही थी.

कांग्रेस-भाजपा में विद्रोह और टूट-फूट

भाजपा के कुछ उम्मीदवारों के नाम सामने आने शुरू हो गए थे. वहीं, कांग्रेस ने अंतिम समय तक उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की. कुछ लोगों को मंगलवार सुबह से ही फोन आने शुरू हो गए थे. भाजपा की मध्य नागपुर इस निर्वाचन क्षेत्र के लिए उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने में देरी हुई. इस निर्वाचन क्षेत्र के प्रभाग 18 और 22 के उम्मीदवारों के चयन में भी देरी हुई. उत्तर नागपुर के इस निर्वाचन क्षेत्र को लेकर कांग्रेस में विवाद चल रहा है. इसी वजह से गठबंधन के टूटने के आरोप लग रहे हैं.