– 10 महीने की देरी के बाद हरी झंडी : जिला परिषद का सीसीटीवी प्रस्ताव मंजूर
– आचार संहिता से पहले रेस : तीन महीने में सीसीटीवी लगाने की तैयारी
नागपुर :- पालघर-ठाणे की पिछली घटना के बाद, सरकार ने पूरे जिला परिषद के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया था. जिला परिषद ने जल्दबाजी में प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन धनराशि की कमी के कारण प्रस्ताव में देरी हुई. अब जिला परिषद ने चार करोड़ रुपये की धनराशि के साथ इस सीसीटीवी कैमरे को मंजूरी दे दी है. शिक्षा विभाग ने इस प्रस्ताव को आगे की जांच के लिए भेज दिया है.
45० स्कूलों के लिए प्रस्ताव दस महीने तक प्रशासनिक प्रक्रिया में अटका रहा. प्रशासन ने तकनीकी मंजूरी के लिए प्रस्ताव को पुणे कार्यालय भेजा. उसके बाद, कुछ स्थानीय स्वीकृतियां प्राप्त की गईं और प्रस्ताव की विशिष्टताओं को अंतिम रूप दिया गया. इसे वीएनआईटी को भेज दिया गया है, छात्रों की सुरक्षा से संबंधित इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को और कितने दिन इंतजार करना पड़ेगा.?
जिला परिषद के अंतर्गत 1512 विद्यालय हैं. संभावना है कि 1०० से अधिक ब’चों वाली 45० अतिरिक्त शालाओं को इसमें शामिल किया जाएगा. इसके लिए 1.7 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है. इस प्रस्ताव की फाइल तकनीकी अनुमोदन के लिए पुणे भेजी गई थी. शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही इस सीसीटी को मंजूरी मिलना जरूरी था. मामले की गंभीरता सामने आ चुकी थी. तत्कालीन शिक्षा समिति द्वारा याचिकाकर्ता विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लेने के बाद शिक्षा विभाग ने तुरंत एक प्रस्ताव तैयार किया था.
नागपुर के स्कूलों में अब तीसरी नजर
जिला परिषद की आचार संहिता कुछ दिनों में लागू होने की संभावना है. उससे पहले आपूर्तिकर्ता की पहचान करना और लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक है. यह सीसीटीवी अगले तीन महीनों में स्थापित किया जाएगा और इस पर तीसरी नजर रहेगी. लेकिन धन की कमी के कारण प्रस्ताव में देरी हुई. पिछले साल, ठाणे-पालघर के स्कूल में यह घटना सामने आई. इसके बाद प्रशासन हरकत में आया.



