– वन विभाग ने चार लोगों के खिलाफ की कार्रवाई
सचिन चौरसिया, रामटेक :- तालुका के पवनी वन क्षेत्र में स्थित वन विभाग ने सावंगी में एक बड़ी कार्रवाई की है। सावंगी बीट के आरक्षित वन सेल संख्या ४२३ में दो जंगली घोरपड का शिकार करने, उनका मांस काटकर भूनने के आरोप में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और वन विभाग ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई गुरुवार (१३ तारीख) को की गई। सावंगी निवासी सागर शेषराव धुर्वे (उम्र २३), रविंद्र बुध्या मरस्कोल्हे (उम्र ४२), प्रशांत विवेक मरस्कोल्हे (उम्र २६) और दिनेश जगत आहाके (उम्र १८ वर्ष ९ महीने) को मौके से हिरासत में लिया गया। गश्त पर निकली वन विभाग की एक टीम ने सावंगी बीट के आरक्षित वन सेल संख्या ४२३ में संदिग्ध गतिविधियों को देखा। जब उन्होंने मौके पर पहुंचकर जांच की, तो पाया कि चारों ने दो जंगली घोरपड का शिकार किया था और उनका मांस काटकर भून रहे थे। इसके परिणामस्वरूप, वन विभाग की टीम ने चारों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से दो घोरपड़ का मांस, दो सत्तूर, दो ब्लेड, भीरी प्रजाति का एक अंडा और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए। मृत घोरपड़ के मांस के नमूने लेकर जांच के लिए नागपुर शहर की एक प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर रामटेक कोर्ट में पेश किया जाएगा। नागपुर वन विभाग की उपवनसंरक्षक डॉ. विनीता व्यास, सहायक वनसंरक्षक गोविंद लुचे और मानद वन्यजीव संरक्षक अविनाश लोंढे के मार्गदर्शन में, सहायक वनसंरक्षक की देखरेख में यह अभियान चलाया गया। इस अभियान में पवनी सागर बनसोड के वन रेंज अधिकारी, क्षेत्र सहायक वाय. बी. पाटिल, बीटगार्ड एम. पी. पंचबुधे, वनरक्षक जी. ओ. राउत, व्ही. एस. सोडगीर, एस. आर. मरास्कोल्हे, इमरत टेकाम, विनोद टेकाम और अन्य वन अधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस मामले की आगे की कानूनी जांच सागर बनसोड के वनरेंज अधिकारी द्वारा की जा रही है।
भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत घोरपड़ नामक जंगली जानवर अनुसूची १ में सूचीबद्ध है। घोरपड़ का शिकार करना, बेचना और उसका मांस खाना अपराध है। साथ ही, किसी भी जंगली जानवर का शिकार करना, उसकी तस्करी करना और उसे अपने पास रखना भी अपराध है। जिले के कई हिस्सों में घोरपड़ का शिकार बड़े पैमाने पर किया जाता है। घोरपड़ का मांस सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, इसलिए घोरपड़ को देखते ही उसका शिकार कर लिया जाता है।





