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शराब प्रकल्प को लेकर गोरेगांव नप में घमासान

– सुनवाई से दो दिन पहले दी थी जानकारी: मुख्याधिकारी

गोंदिया :- गोरेगांव नगर पंचायत क्षेत्र के एमआईडीसी में प्रस्तावित मे.इंडस ऑर्गेनिक्स के महुआ फूल आधारित आसवनी तथा स्पिरिट/लिकर ब्लेंडिंग-बॉटलिंग प्रकल्प को लेकर नगर पंचायत में विवाद खड़ा हो गया है। पर्यावरणीय जनसुनवाई की सूचना जनप्रतिनिधियों को समय पर दिए जाने को लेकर मुख्याधिकारी और पदाधिकारी आमने-सामने हैं।

महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) के भंडारा उप प्रादेशिक कार्यालय ने 13 अगस्त 2026 को पत्र जारी कर परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई 18 सितंबर को दोपहर 12.30 बजे ए-12, एमआईडीसी, गोरेगांव में आयोजित किए जाने की जानकारी दी थी। प्रस्तावित प्रकल्प की क्षमता प्रतिदिन 5 किलोलीटर महुआ फूल/फल आधारित आसवनी की है। इसमें स्पिरिट/लिकर के ब्लेंडिंग और बॉटलिंग का भी प्रस्ताव है।

‘महत्वपूर्ण जानकारी समय पर नहीं दी गई’:

नगर पंचायत के कुछ पदाधिकारियों और नगरसेवकों का आरोप है कि एमपीसीबी का पत्र प्राप्त होने के बावजूद इसकी जानकारी नगराध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नगरसेवकों को समय पर नहीं दी गई। उनका कहना है कि पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रकल्प की जानकारी मिलने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों को अपनी आपत्तियां व सुझाव रखने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए था।पदाधिकारियों ने पत्र की आवक तारीख, आवक क्रमांक और जनप्रतिनिधियों को सूचना दिए जाने की तारीख सहित संबंधित कार्यालयीन रिकॉर्ड सामने रखने की मांग की है।

मुख्याधिकारी का दावा पहले दी थी सूचना:

नगर पंचायत के मुख्याधिकारी अक्षय परदेशी ने आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त का एमपीसीबी पत्र नगर पंचायत को प्राप्त हुआ था, लेकिन उसमें कंपनी द्वारा नगर पंचायत से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मांगे जाने का उल्लेख नहीं था। उनके अनुसार, जनसुनवाई से दो दिन पहले नगर पंचायत के सभी पदाधिकारियों को मामले की जानकारी दे दी गई थी।

उपाध्यक्ष बोले- ‘विज्ञापन के बाद पता चला’:

मुख्याधिकारी के दावे पर नगर पंचायत उपाध्यक्ष मलेशाम येरोला ने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि 15 अगस्त को अखबार में एमपीसीबी की जनसुनवाई का विज्ञापन प्रकाशित होने के बाद ही पदाधिकारियों को प्रकल्प की जानकारी मिली। येरोला ने कहा कि एमपीसीबी का पत्र नगर पंचायत में प्राप्त होते ही नगराध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नगरसेवकों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी।

रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी स्थिति

दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बाद अब विवाद का केंद्र नगर पंचायत का आधिकारिक रिकॉर्ड बन गया है। एमपीसीबी के पत्र का आवक क्रमांक, पत्र प्राप्त होने की तारीख, संबंधित अधिकारी के पास भेजे जाने की नोंद और पदाधिकारियों को सूचना दिए जाने का रिकॉर्ड सामने आने पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

इस बीच प्रस्तावित प्रकल्प को लेकर स्थानीय स्तर पर पर्यावरण, पानी, सांडपानी, औद्योगिक कचरा और यातायात जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। नागरिकों की नजर अब नगर पंचायत के रिकॉर्ड और परियोजना से जुड़ी आगे की आधिकारिक प्रक्रिया पर टिकी है।


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