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नाले पर बने अवैध पुलों पर हाईकोर्ट सख्त

 – मनपा को प्रतिवादी बनाने की दी गई अनुमति

– कहा- प्राकृतिक जल प्रवाह को बाधित नहीं किया जा सकता है

नागपुर :- बजाज नगर से काछीपुरा के बीच स्थित एक नाले के किनारे बनाए गए अवैध पुलों और कथित नियम उल्लंघनों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताई है। साथ ही, अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि प्राकृतिक जल प्रवाह को किसी भी स्थिति में बाधित नहीं किया जा सकता।

यह जनहित याचिका डॉ. ललित हरोवे और अन्य द्वारा दायर की गई है। मामले पर सोमवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष हुई। अदालत ने याचिकाकर्ता को मनपा को प्रतिवादी बनाने की अनुमति देते हुए संबंधित कार्रवाई पर स्फट रुख बताने को कहा। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ विधिग्य अक्षय नाईक ने दलील दी कि नाले के किनारे स्थित कुछ होटलों ने पीछे की और बहने वाले नाले पर अवैध पुल बना रखे हैं, जिससे पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है और बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन पुलों का उपयोग ग्राहकों को पुलिस कार्रवाई से बचाने के लिए किया जाता है।

इसके अलावा, संबंधित प्रतिष्ठानों में आवश्यक अनुमति के बिना शराब परोसे जाने और आधी रात के बाद भी कारोबार जारी रखने की बात भी सामने आई। इससे क्षेत्र में देर रात तक वाहनो की भीड़ रहने की शिकायत भी की गई। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस और मनपा की ओर से इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। साथ ही. डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय की भूमि पर हुए अतिक्रमण हटाने की मंग मै उठाई गई।

याचिका में संशोधन की अनुमति

गौरतलब है कि अब तक इस मामले में मनपा को प्रतिवादी नहीं बनाया गया था। इसलिए अदालत ने याचिकाकर्ता को मनपा को प्रतिवादी के रूप में शामिल करने तथा याचिका में संशोधन करने की अनुमति दी है। साथ ही, कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर अदालत ने पुलिस प्रशासन को शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए है। राज्य सरकार की ओर से एड. संगीता जाचक ने पैरवी की।


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