नागपुर :- बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने रिट याचिका क्रमांक xxxx/2026 में याचिकाकर्ता को बड़ी राहत प्रदान की है। माननीय न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर एवं राज डी. वाकोडे की खंडपीठ ने प्रथमदृष्टया यह माना कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध की गई कार्रवाई असमतुल्य (डिसप्रोपोर्शनट) प्रतीत होती है और यह सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के अनुरूप नहीं है।
याचिकाकर्ता की ओर से नियुक्त अधिवक्ता प्रीति बडवाइक (पेंडके), जिन्हें विधिक सहायता (लीगल एड) के माध्यम से नियुक्त किया गया है, ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि संबंधित प्राधिकरण द्वारा की गई कार्रवाई विधि के प्रावधानों से परे है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है। न्यायालय ने उनकी दलीलों पर गंभीरता से विचार करते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया।
अदालत ने प्रतिवादियों को 18 मार्च 2026 तक अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही, न्यायालय ने प्रतिवादी क्रमांक 3 को निर्देशित किया है कि वह याचिकाकर्ता से संबंधित समस्त डेटा को सुरक्षित रखे तथा अगली सुनवाई तक उसे नष्ट न करे। यह निर्देश याचिकाकर्ता के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रतिवादी क्रमांक 1 की ओर से उपस्थित उप सॉलिसिटर जनरल ने नोटिस की सेवा स्वीकार की। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता निजी माध्यम से भी नोटिस की सेवा कर सकता है।
यह आदेश डिजिटल अधिकारों, विधिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की रक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायालय की प्रारंभिक टिप्पणियों से यह संकेत मिलता है कि याचिकाकर्ता के पक्ष में प्रथमदृष्टया मजबूत आधार मौजूद हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 को निर्धारित है।




