– टैंकर पलटने से रास्ता बंद था; गाड़ियों की 25km लंबी कतारें, डेढ़ लाख से ज्यादा लोग फंसे थे
मुंबई-पुणे :- मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर करीब 31 घंटे बाद गुरुवार सुबह ट्रैफिक जाम खुल गया। यहां 3 फरवरी से डेढ़ लाख वाहनों में लोग फंसे थे। गाड़ियों की 25 किमी लंबी कतारें लग गई थीं। जाम में फंसे लोगों को खाना, पानी और टॉयलेट सुविधाओं की कमी के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस जाम में फंसे लोगों में उद्योगपति और पिनैकल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुधीर मेहता भी शामिल थे। वे एक्सप्रेसवे पर लगभग आठ घंटे तक फंसे रहे और बाद में उन्हें हेलिकॉप्टर से पुणे ले जाया गया। मेहता ने बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हेलिकॉप्टर से ली गई जाम की तस्वीर शेयर की। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर खंडाला घाट सेक्शन में 3 फरवरी की शाम करीब 5 बजे अडोशी टनल के पास एक गैस टैंकर पलट गया था। टैंकर से प्रोपाइलीन गैस लीक हो रही थी। इसके बाद सुरक्षा कारणों से एक्सप्रेसवे के कई हिस्से बंद करने पड़े थे। महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MSRDC) के अनुसार, टैंकर में मौजूद प्रोपाइलीन गैस को दूसरे टैंकरों में ट्रांसफर किया गया। फिर क्षतिग्रस्त टैंकर को रास्ते से हटाया गया। तब जाकर जाम धीरे-धीरे खुलना शुरू हुआ।

NDRF, SDRF और भारत पेट्रोलियम की टीमें तैनात
गैस लीक के बाद हालात संभालने के लिए NDRF, SDRF और भारत पेट्रोलियम (BPCL) की टीमें मौके पर तैनात की गई थीं। पुणे से मुंबई जाने वाली लेन पूरी तरह बंद कर दी गई थी और ट्रैफिक को पुराने मुंबई-पुणे हाईवे की ओर डायवर्ट किया गया था। स्थिति को कुछ हद तक संभालने के लिए पुणे लेन से मुंबई की ओर 15–20 मिनट के ब्लॉक में गाड़ियां जा रही थी। हालांकि, बुधवार शाम तक गैस लीक जारी रहने से जाम बढ़ता ही जा रहा था। बुधवार शाम तक वाहनों की कतारें करीब 20 किलोमीटर तक फैल गई थीं।
एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों से टोल वसूली रोकी गई
जाम खुलने से पहले MSRDC ने बताया था कि यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए मुंबई-बाउंड कैरिजवे बंद रखा गया है, जिससे दोनों दिशाओं में ट्रैफिक प्रभावित हुआ। इस दौरान एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी बुधवार सुबह से निलंबित कर दी गई थी। जाम का असर बस सेवाओं पर भी पड़ा। महाराष्ट्र राज्य परिवहन निगम (MSRTC) की 165 बसें अलग-अलग जगहों पर फंसी रहीं। बुधवार को 139 बस सेवाएं रद्द करनी पड़ीं, जिनमें 73 ई-शिवनेरी और 66 सामान्य बसें शामिल थीं। परिवहन विभाग के अनुसार, 163 बसें एक्सप्रेसवे पर फंसी रहीं। इनमें सतारा की 46, सोलापुर की 36, पुणे की 20, सांगली की 18, कोल्हापुर की 13, पालघर की 12, ठाणे की 11 और मुंबई डिवीजन की 7 बसें शामिल थीं।




