– अनिल देशमुख की मौजूदगी में एनसीपी हुई आक्रामक, सरकार को चेतावनी: “अब और नहीं चुप रहेंगे किसान”
नागपुर :- शहर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृहनगर में शुक्रवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) ने किसानों की दुर्दशा और सरकार की नीतियों के खिलाफ “काली दिवाली” मनाई। जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने हुए इस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने “मुख्यमंत्री मुर्दाबाद” और “पालकमंत्री मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाकर सरकार के प्रति गहरी नाराज़गी जताई। प्रदर्शन का नेतृत्व नागपुर शहर अध्यक्ष दुनेश्वर पैठे ने किया, जबकि राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख भी इस मौके पर उपस्थित रहे। किसानों की पुकार: कर्जमाफी, फसल बीमा सुधार और बारिश से नुकसान का मुआवज़ा माँगा और प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपते हुए कई माँगें रखीं — किसानों की पूर्ण ऋण माफी का तत्काल क्रियान्वयन, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता, संतरा व नींबू उत्पादकों को मुआवज़ा, फसल बीमा योजना में सुधार, और कपास आयात शुल्क की पुनः शुरुआत व सोयाबीन खली निर्यात बढ़ाने की माँगें प्रमुख रहीं। किसानों ने कहा कि विधानसभा चुनावों के दौरान किए गए कर्जमाफी के वादे अब तक अधूरे हैं, जिससे किसानों में निराशा है।
किसानों ने कहा कि लगातार भारी बारिश और गलत कृषि नीतियों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है।
फसल बीमा के नियम इतने सख्त हैं कि अधिकांश किसान उसका लाभ नहीं ले पा रहे।
कपास और खाद्य तेल के आयात से घरेलू उत्पादों की कीमतें गिर रही हैं, जिससे किसान संकट में हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार यदि समय रहते कदम नहीं उठाती, तो यह संकट आने वाले मौसम में और गहराएगा। इस प्रदर्शन में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के सैकड़ों कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने भाग लिया। पूर्व मंत्री अनिल देशमुख और शहर अध्यक्ष दुनेश्वर पैठे ने किसानों की आवाज़ को बुलंद करते हुए कहा कि राज्य और केंद्र सरकार दोनों ने किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। प्रदर्शन में वेदप्रकाश आर्य, शैलेन्द्र तिवारी, महेंद्र भांगे, रेखा कृपाले, सुभाष नासरे, धनंजय देशमुख सहित अनेक नेता और किसान मौजूद रहे। कलेक्टर ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए इसे आगे सरकार तक पहुँचाने का आश्वासन दिया।
किसानों के साथ कांग्रेस की एकजुटता दिखी सड़कों पर
राज्य के किसान जहाँ आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिवाली जैसे त्योहारी मौसम में भी सरकार द्वारा कर्जमाफी, सहायता या राहत प्रदान न करने के विरोध में अचलपुर स्थित तहसील कार्यालय के सामने ‘किसान आंदोलन की काली दिवाली’ मनाई। इस आंदोलन के दौरान, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और किसानों ने प्रतीकात्मक रूप से ‘झुंका-भाकर’ खाकर किसानों के जीवन की कड़वी सच्चाई को उजागर किया और सरकार की निष्क्रिय नीतियों के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त किया। फसलों की बर्बादी, बढ़ते कर्ज और कृषि उत्पादों की गिरती कीमतों के कारण किसान पूरी तरह से थक चुके हैं। कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने ऐसी विकट स्थिति में भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जिससे दिवाली के मौसम में भी किसान मायूस हैं। सरकार के इस उदासीन रुख के विरोध में कांग्रेस जिला अध्यक्ष बबलू देशमुख के नेतृत्व में यह आंदोलन किया गया।



