– साहूकारों का अमानवीय अत्याचार : कंबोडिया में किडनी बेचने को मजबूर हुआ किसान
– 6 साहूकार गिरफ्तार
चंद्रपुर/नागभीड़ :- कर्ज में डूबे एक किसान ने कर्ज चुकाने के लिए अपनी किडनी 8 लाख रुपये में बेच दी. किडनी बेचने के बाद भी 1 लाख का कर्ज बढ़कर 74 लाख हो गया. पीड़ित किसान का नाम रोशन सदाशिव कुडे है. बताया जाता है कि एक साहूकार के कहने पर कोलकाता में जांच कर कंबोडिया में किडनी बेची गई. चंद्रपुर जिले की नागभीड़ तहसील अंतर्गत मिंथुर में साहूकारों के दबाव की चौंकाने वाली घटना मंगलवार को सामने आई. इस घटना ने जिले में हड़कंप मचा दिया है. हालांकि पीड़ित किसान पुलिस के पास गया था परंतु कोई सहयोग नहीं मिला,पीड़ित रोशन मंत्रालय के सामने सपरिवार आत्मदाह की चेतावनी दे रहा है. अब जिला पुलिस अधीक्षक मुमक्का सुदर्शन कह रहे हैं कि पुलिस की टीम नागभीड़ थाने भेजी गई है, जांच के बाद सही कार्रवाई होगी.
निरंतर घाटे में जाती खेती से उबरने के लिए रोशन ने डेयरी व्यवसाय करने के लिए गाये खरीदी. इसके लिए 2 साहूकारों से पचास-पचास हजार रुपये के ऋण लिए. खेती की तरह डेयरी व्यवसाय ने भी उसका साथ नहीं दिया. खरीदी हुई गायें अचानक मर गई. फिर उसे अपना ट्रैक्टर, घर, 2 एकड़ खेती व सामान बेचना पड़ा. इससे भी जब बात नहीं बनी तो उसने किडनी बेच दी. परंतु चौंकाने वाली ब्याज दर के कारण 1 लाख का कर्ज 74 लाख तक पहुंच गया है. बताया जाता है कि साहूकार 1 लाख पर हर दिन 10,000 रु. ब्याज ले रहा था. गांव मिंथुर के एक किसान को अवैध साहूकारों से लिये गए एक लाख रु. का कर्ज चुकाने के लिए करीब 74 लाख रु. चुकाने पड़े. इसके लिए उसे साहूकारों ने खेत बेचने के साथ-साथ अपनी किडनी बेचने पर मजबूर किया. इस अमानवीय अत्याचार का चौंकाने वाला मामला सामने आने के बाद पुलिस ने 6 अवैध साहूकारों को गिरफ्तार किया है. हैरत की बात यह है कि साहूकारों ने कंबोडिया जाकर किडनी बेच दी. पीड़ित किसान का नाम रोशन कुले (35) है. इस मामले में मंगलवार को ब्रह्मपुरी पुलिस स्टेशन में 6 लोगों के खिलाफ धारा 120 बी, 326, 342, 294, 387, 506, 34 भादंवि और धारा 39, 44 महाराष्ट्र साहूकारी अधिनियम 2014 के तहत मामला दर्ज किया गया है. गिरफ्तार आरोपियों में किशोर बावनकुले, लक्ष्मण उरकुडे, प्रदीप बावनकुले, संजय बल्लारपुरे, मनीष पुरुषोत्तम घाटबांधे, सत्यवान रबोरकर का समावेश है. सभी ब्रह्मपुरी के रहने वाले हैं. पुलिस के अनुसार, रोशन ने दूध उत्पादन का व्यवसाय करने के लिए 15 से 20 गाय खरीदी थीं. कुछ पशुओं की लंपी रोग से मृत्यु हो जाने के कारण उसे व्यवसाय में घाटा उठाना पड़ा. संकट में घिरे रोशन ने ब्रह्मपुरी के कुछ अवैध साहूकारों से एक लाख रु. का कर्ज लिया. चार-पांच लोगों के एक गिरोह ने अत्यधिक ब्याज वसूल कर उन्हें परेशान करना शुरु कर दिया. कर्ज चुकाने के लिए रोशन ने अपना दोपहिया वाहन, ट्रैक्टर और साढ़े तीन एकड़ जमीन भी बेच दी; लेकिन ब्याज का पहाड़ बढ़ता ही गया.




