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इस्कॉन द्वारा कृष्ण जन्माष्टमी भक्तिमय वातावरण में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न

नागपुर १ : अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) के नागपुर केन्द्र श्री श्री राधा गोपीनाथ मंदिर (गेट नंबर 2, एम्प्रेस मॉल के पीछे, गांधी सागर, नागपुर) में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव भक्तिमय वातावरण में अत्यंत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

मंदिर प्रांगण को आकर्षक फूलों, विद्युत सजावट और आध्यात्मिक संदेशों एवं विभिन्न लीलाओं द्वारा अलंकृत किया गया। जिसमें प्रमुख रही झारखंड लीला, वृंदावन लीला इत्यादि। एक लाख से भी ज्यादा श्रद्धालु भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य महोत्सव में भाग लेकर भक्ति रस का अनुभव किया।

इस्कॉन संस्थापकाचार्य ए सी भक्ति वेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद के प्रिय शिष्य श्रील लोकनाथ स्वामी महाराज की प्रेरणा से मनाए गए इस प्रोग्राम के मुख्य अतिथि थे नागपुर शहर के पुलिस कमिश्नर डॉ. रविन्द्र सिंघल एवं विशेष अतिथि डेप्युटी कमिश्नर ऑफ पुलिस (ग्रामीण) दीपक अग्रवाल। अतिथियों की अगवानी डॉ. श्यामसुंदर शर्मा ने की। सर्व प्रथम कमिश्नर साहब ने श्री राधा कृष्ण के छोटे विग्रहों का दूध दही घी शक्कर एवं शहद के मिश्रण (पंचामृत) से अभिषेक किया। उसके बाद श्री श्री राधा गोपीनाथ के मूल विग्रह के दर्शन किए। कल्पतरु प्रभु ने भगवान के हाथ का गुलदस्ता देकर उनका सत्कार किया। उसके बाद उन्होंने इस्कॉन यूथ फोरम के युवा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुये कहा इतनी बड़ी संख्या में समर्पित युवाओं को देख कर बड़ी प्रसन्नता हो रही है। हिमांशु प्रभु ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सभी युवा इंजीनियरिंग एवं मेडिकल इत्यादि कॉलेज के विद्यार्थी है। किसी भी तरह का कोई नशा नहीं करते। यहां तक कि चाय कॉफी भी नहीं लेते। सी पी साहब ने कहा इस्कॉन का कार्य एवं हमारा नशा मुक्ति का कार्य एक जैसा ही है। शांतनु प्रभु ने कहा इस्कॉन की स्थापना नशा मुक्ति से ही प्रारंभ हुई। अमेरिका में जब हिप्पियों का आतंक था। सभी हर तरह का नशा करते थे। वहां की सरकार भी परेशान थी। प्रभुपाद ने उन हिप्पियों को नशा मुक्त करके कृष्ण भक्ति में लगा दिया। अब वो भी अभी चाय कॉफी भी नहीं पीते। उनमे से कई तो इस्कॉन के सन्यासी भी बन गए। उसके बाद डॉ. सिंघल इस्कॉन गर्ल्स फोरम के युवतियों को भी संबोधित किया। हरिकीर्तन प्रभु ने सिंघल साहब को इस्कॉन के जन्माष्टमी कार्यक्रम में आने के लिए धन्यवाद दिया। अंत में परम करुणा प्रभु ने श्री ल प्रभुपाद द्वारा लिखित “कृष्णा” पुस्तक भेंट स्वरूप दी।
विशेष अतिथि दीपक अग्रवाल ने भगवान का अभिषेक विभिन्न फलों के रस से किया। श्री श्री राधागोपीनाथ के दर्शन के बाद झारखंड लीला के दर्शन किया जिसमें चैतन्य महाप्रभु ने जब झारखंड के जंगल में कीर्तन किया तब हिरण एवं शेर आदि जानवरों ने एक साथ कीर्तन किया। वो दृश्य साकार रूप में था
इस्कॉन नागपुर के प्रवक्ता डॉ श्यामसुंदर शर्मा ने कहा दर्शनार्थियों का तांता सुबह 4.30 बजे से लेकर रात्रि 12.30 बजे तक रहा। दर्शनाथियों को किसी भी प्रकार की तकलीफ न हो इसके लिए रेलिंग आदि लगा कर व्यवस्था सुचारू रूप से की गई थी। एक तरफ सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए बड़ा पंडाल बनाया गया तरह दूसरी तरफ अभिषेक की व्यवस्था की गई जो सुबह 11 बजे से 11 रात्रि बजे तक सुचारू रूप से चली।

शाम 5 बजे पंडाल प्रोग्राम का शुभारम्भ हुआ। भक्तों द्वारा हरे कृष्ण महा मंत्र “हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे कृष्ण।।” का कीर्तन किया गया। उसके बाद विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गये जिसमें प्रमुख है राधामाधव भरतनाट्यम, राधा गोरी गोरी नृत्य, यशोमती नंदन नृत्य, दशावतार नाटक नृत्य, राधा रमण हरि गोविंद नृत्य, कृष्ण – भारत की महिमानृत्य (थीमैटिक), जन्म बधाई उत्सव, गंग्स ऑफ वृंदावन, द सेकंड चांस, कृष्णलीलानृत्य इत्यादि। कार्यक्रम का सफल संचालन इस्कॉन गर्ल्स फोरम की प्रीति सेनगुप्ता ने किया। नृत्य एवं नाट्य प्रस्तुतियों का आकर्षक कोरियोग्राफ़ी इन्द्रजीत प्रभु द्वारा किया गया। इस्कॉन गर्ल्स फोरम की आदिशक्ति माताजी एवं शुभांगी राधा माताजी तथा गोपाल गार्डन के गोपाल लीला प्रभु के मार्गदर्शन में सभी छोटे-बड़े कलाकारों ने अत्यंत सुंदर प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्हें उपस्थित भक्तों ने भरपूर सराहा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पश्चात् इस्कॉन के हरि कीर्तन प्रभुजी ने सुंदर कृष्ण-लीला का वर्णन किया तथा अपने उद्बोधन में कहा कि आज की पीढ़ी के लिए नैतिक शिक्षा अत्यंत आवश्यक है, जो कि वर्तमान शिक्षा-पद्धति में उन्हें प्राप्त नहीं हो पा रही है। इसी शून्यता की पूर्ति हेतु इस्कॉन के माध्यम से समस्त जनमानस को भगवद्गीता का ज्ञान एवं वैदिक शिक्षा प्रदान करने का संकल्प है।
प्रभुजी ने बताया कि इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए इस्कॉन का नया मंदिर – आई.वी.सी.सी. (अंतर्राष्ट्रीय वैदिक सांस्कृतिक केंद्र) – जामठा के पास इंपीरियन सिटी में निर्माणाधीन है, जहाँ समस्त जनमानस को व्यवस्थित रूप से भगवद्गीता का ज्ञान एवं वैदिक शिक्षा दी जाएगी।
अंत में मध्य रात्रि 12.00 बजे भगवान की महा आरती भव्य कीर्तन एवं हर्षोल्लास के साथ हुई एवं साथ ही  56 भोग भी  अर्पित किए गये।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सचिदानंद प्रभु, हरि कीर्तन प्रभु, व्रजेन्द्र तनय प्रभु, प्राणनाथ प्रभु, आराध्य भगवान प्रभु, विशाल प्रभु, श्रीपंढरीनाथ प्रभु, परमकरुणा प्रभु, साधना भक्ति माताजी, वेणुगोपाल प्रभु, संजय गुप्ता प्रभु, किशन दवे प्रभु, धीरज अग्रवाल प्रभु, आशीष खंडेलवाल प्रभु, गौर प्रसाद प्रभु, शांतनु प्रभु इत्यादि ने सहयोग किया।


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