– फर्जी किसान, फर्जी बिल और असली पैसा गायब : उमरेड तालुका बना भ्रष्टाचार का अड्डा
– जेरॉक्स की दुकान से स्टेशनरी खरीद ! कृषि परियोजनाओं में कागजी घोटालों की पोल खुली
नागपुर :- राज्य का कृषि विभाग दुनिया भर के किसानों के जीवन के खिलाफ खड़ा हो गया है.. इस विभाग में व्याप्त भ्रष्ट्राचार को देखकर यहां के अधिकारियों का समूह की श्रृंखला मालामाल हुई है. मुंबई स्थित कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उदासीनता कृषि विभाग में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है. अनाज और अन्य परियोजनाओं के लिए केवल पंजीकृत किसानों के नाम इस्तेमाल किए जा रहे हैं और फर्जी बिलों के जरिए खर्चों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है. इसके साथ ही यह भी सामने आया है कि किसानों के लिए ‘कीट’ खरीदने और बांटने की आड़ में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई है.
राज्य का कृषि विभाग विद्रोह कर रहा है और किसानों के जीवन को खतरे में डाल रहा है. उमरेड तालुका कृषि विभाग भ्रष्टाचार से ग्रस्त है, अधिकारी मालामाल हो रहे हैं.
राज्य के अन्य जिलों के अलावा, नागपुर संभागीय संयुक्त कृषि संचालक कार्यालय केअधीन विभाग भ्रष्टाचार में सबसे आगे है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, खापरी (रा) गांव के कृषि सहायक एस.ए. धनविजय पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2०21-2०22 के दौरान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत सोयाबीन और तुअर की अनाज परियोजना में गांव के किसान होने के दस्तावेज दिखाकर बाहरी लोगों को लाभ पहुंचाया. इनमें सुरगांव गांव के एक ही परिवार के पति-पत्नी भी शामिल हैं. दोनों को एक ही खेत सर्वे नंबर पर यह दोहरा कीट योजना का लाभ दिया गया है.
इसके अलावा, हलदगांव के चांपा गांव की कृषि सहायक शिल्पा सुके ने वर्ष 2०21-2०22 के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन केतहत क्षेत्र से बाहर के उन व्यक्तियों के नाम पर कीट का लाभ प्रदान किया, जिनकी खेती क्षेत्र में नहीं है और हिवरा-हिवरी निवासी शंकर नुसा सुके और हलदगांव के चांपा गांव निवासी धनराज परसराम बेले केनाम पर भी लाभ प्रदान किया.
चिमनाझ़ारी में वर्ष 2०22 से 2०23 तक गेेहूं की फसल की परियोजना लागू की गई थी. इसके लिए 2 मार्च को नागपुर के बांबोडकर जेरॉक्स एंड स्टेशनरी की दुकान से स्टेशनरी सामग्री खरीदी गई थी.
2०23 में, यह दिखाया गया कि डीटीपी कार्य के साथ स्टेशनरी भी खरीदी गई थी. हालांकि, इस दुकान में केवल जेरॉक्स प्रतियां ही जारी की जाती हैं. चिमनझरी गांव में कृषि दिवस परियोजना के कार्यान्वयन केदौरान भी यही स्थिति रही. स्वयं सहायता समूह, चिमनझरी, तालुका उमरेड दिनांक 1० मार्च 2०23, भारती महिला स्वयं सहायता समूह, भीवापुर और बांबोडकर जेरॉक्स एंड स्टेशनरी, नागपुर दिनांक 17 जनवरी 2०23, तथा महात्मा फुले द्वारा चिमनझारी गांव में 18 अक्टूबर 2०22 को आयोजित कृषि दिवस कार्यक्रम में भी यही बात सामने आई.
स्वयं सहायता महिला समिति समूह के नामों का इस्तेमाल भुगतान के लिए फर्जी बिल तैयार करने में किया गया. इसके साथ ही, यह आरोप है कि डिजिटल बैनर नामक दुकान से बिल संख्या 536 दिनांक 5 अक्टूबर, 2०22 को तैयार किया गया था और इसे 15 जनवरी को ही जमा कर दिया गया था. इस प्रकार, यह आरोप है कि फर्जी बिल के खर्च और किसानों के लिए परियोजना के नाम पर कीट (सामग्री, अनाज और अन्य सामग्री) के रूप में इनपुट का वितरण नहीं किया गया, बल्कि संबंधित क्षेत्रों से बाहर के व्यक्तियों के नाम पर दिखाया गया, जिससे सरकारी खजाने को धोखा दिया गया.
किसानों के फर्जी हस्ताक्षरों से सरकारी खजाने पर डाका
19 जुलाई 2०22 को वडद गांव के किसानों के लिए प्रथम श्रेणी का कृषि शाला और 3 मार्च 2०22 को द्वितीय की कृषि शाला आयोजित की गई. इन दोनों कृषि विद्यालयों में उपस्थित कुछ किसानों के हस्ताक्षरों में विसंगतियां पाई गईं, जिससे संकेत मिलता है कि फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया था. अत: यह प्रश्न उठता है कि इस कार्यक्रम के नाम पर फर्जी व्यय बिल किसने तैयार किए और जमा किए.




