मुंबई :- भाषा संस्कृति को जीवित रखने का माध्यम है। देश की हर भाषा ने सांस्कृतिक विरासत में योगदान दिया है। चूँकि इस सांस्कृतिक उत्थान में भाषा का महत्व है, इसलिए सभी को अपनी मूल भाषा, मातृभाषा और अन्य भाषाओं को जीवित रखने का प्रयास करना चाहिए। हमारी मराठी भाषा कल भी विशिष्ट थी, आज भी विशिष्ट है और कल भी विशिष्ट रहेगी, ऐसा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति को जीवित रखने की आत्मा है। उन्होंने इस अवसर पर मराठी भाषा की गरिमा और सांस्कृतिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा, “हमारी मराठी भाषा कल भी विशिष्ट थी, आज भी विशिष्ट है और आनेवाले कल में भी विशिष्ट बनी रहेगी। फडणवीस ने देश की विविध भाषाओं के सांस्कृतिक योगदान की सराहना की और कहा कि हर नागरिक को न केवल अपनी मातृभाषा से प्रेम करना चाहिए, बल्कि उसे संरक्षित और संवर्धित करने का प्रयास भी करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि भाषा के ज़रिए ही परंपराएँ, मान्यताएँ, कला, साहित्य और समाज का बोध अगली पीढ़ियों तक पहुँचता है। उन्होंने सभी भाषाओं को समान सम्मान देने की बात कही, लेकिन मराठी के लिए एक विशेष भावनात्मक जुड़ाव भी व्यक्त किया। भाषा संस्कृति का मूल स्तंभ है: भाषा के बिना सांस्कृतिक पहचान अधूरी है। मराठी की विशेषता मराठी भाषा का ऐतिहासिक, साहित्यिक और सामाजिक योगदान अमूल्य है। मातृभाषा को जीवित रखना जरूरी: युवाओं को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़े रखना समय की मांग है। भविष्य की पीढ़ियों के लिए जिम्मेदारी भाषा के संरक्षण में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण।








