spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

मिड डे मील पर संकट: बच्चों की थाली से हटे अंडे-केले

– पोषण पर उठे सवाल, बच्चों के पोषण पर सीधा असर,अभिभावकों में रोष

गोंदिया :- समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिला परिषद स्कूलों में पढ़नेवाले कक्षा 8 वीं तक के विद्यार्थियों को मिड डे मील परोसा जाता है। इसी आहार के साथ पूरक आहर भी दिया जाता है, लेकिन नए शैक्षणिक सत्र से मिड डे मील में मिलनेवाला पूरक आहार नहीं दिया जा रहा है। इस आहार में विद्यार्थियों की थाली में सप्ताह में एक बार अंडे, केले, मौसमी फल दिए जाते थे, लेकिन अचानक शासन ने विद्यार्थियों को पोषक आहार देना बंद कर दिया है। गोंदिया। समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिला परिषद स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को दिए जाने वाले मिड डे मील में बड़ा बदलाव सामने आया है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही बच्चों को मिलने वाला पूरक आहार पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसका सीधा असर हजारों विद्यार्थियों के पोषण पर पड़ता नजर आ रहा है। अब तक मिड डे मील के साथ विद्यार्थियों को सप्ताह में अंडे और नियमित रूप से केले जैसे पौष्टिक पूरक आहार दिए जाते थे, जिससे बच्चों को प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्व मिलते थे। लेकिन सत्र शुरू होते ही अचानक इन खाद्य पदार्थों को बंद कर दिया गया, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों में गहरी नाराजगी है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पढ़ने वाले कई बच्चों के लिए मिड डे मील ही दिन का सबसे पौष्टिक भोजन होता है। ऐसे में अंडे और फलों जैसे पोषक आहार का हटना बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है। अभिभावकों का कहना है कि सरकार एक ओर बच्चों के कुपोषण को खत्म करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों से पौष्टिक आहार हटाकर उनके स्वास्थ्य के साथ समझौता किया जा रहा है। कई पालकों ने मांग की है कि पूरक आहार तुरंत फिर से शुरू किया जाए।

प्रशासन की चुप्पी

इस पूरे मामले में अब तक शिक्षा विभाग या जिला परिषद की ओर से कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। न तो बजट कटौती को लेकर कोई आधिकारिक बयान दिया गया है और न ही वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी।

सवालों के घेरे में सरकार

विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि मिड डे मील योजना केवल पेट भरने की नहीं, बल्कि पोषण सुनिश्चित करने की योजना है। ऐसे में पूरक आहार बंद करना योजना की मूल भावना के खिलाफ है। अब देखना यह है कि बच्चों की सेहत और भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर सरकार कब संज्ञान लेती है और क्या मिड डे मील में अंडे-केले जैसे जरूरी पोषक तत्वों की वापसी हो पाती है या नहीं।


Click above on our news logo to access the Daily E_Newspaper.
For articles or advertisements, contact us at: dineshdamahe86@gmail.com.

Copyright Disclaimer: If Any Image, video or article belongs to its respective owner/creator. Full credit goes to the original creator. No copyright infringement intended.