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बंद घर में पड़ा रहा मां-बेटी का शव

नागपुर :- एक परिवार की मां-बेटी की आत्महत्या की चर्चा अभी थम ही रही थी कि दूसरे परिवार की एक और मां-बेटी मृत पाई गई. पुलिस का अनुमान है कि दोनों शव चार दिन से बंद घर में पड़े थे. बढ़ते तापमान के बावजूद नागरिकों को दुर्गंध क्यों नहीं आई? क्या संवेदनशीलता खत्म हो गई है? इस मौके पर यही सवाल उठ रहे हैं. यह घटना, जो मन की संवेदनशीलता पर सवाल उठाती है.

यह घटना बुधवार 5 मई की दोपहर को नंदनवन पुलिस स्टेशन क्षेत्र में सामने आई. मृतकों के नाम गाडगे नगर निवासी तुलसाबाई वाढई (65) और संगीता वाढई (48) हैं. पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, तुलसाबाई और उनकी बेटी संगीता दोनों गाडगे नगर में रहती थीं. तुलसाबाई का एक बेटा है. नीलेश विवाहित है और इंजीनियर है. वह भरूच, अहमदाबाद में काम करता है. संगीता मानसिक रूप से विकलांग थी.

नीलेश हर महीने घर के खर्चों के लिए पैसे भेजता था. उसने 2 मई को अपनी मां को फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. कई बार फोन करने के बाद भी मां ने फोन नहीं उठाया. उसने दूसरे और तीसरे दिन भी फोन किया, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर उसने अपने चाचा को फोन करके सूचना दी. नीलेश के चाचा 5 मई को गाडगे नगर गए. उन्होंने दरवाजा खटखटाया, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था. कोई जवाब नहीं मिला. जब उन्होंने खिडक़ी से झांकने की कोशिश की, तो बदबू आई. उन्होंने पड़ोसियों और पुलिस नियंत्रण कक्ष को सूचना दी. जब नंदनवन पुलिस ने दरवाजा तोडक़र अंदर प्रवेश किया, तो तुलसाबाई सोफे पर मृत पाई गईं और संगीता फर्श पर मृत पड़ी मिलीं. पुलिस ने फोरेंसिक टीम को बुलाया. उन्होंने घटनास्थल से नमूने एकत्र किए. नंदनवन पुलिस ने तुरंत अचानक मृत्यु का मामला दर्ज किया है. क्या उनकी मृत्यु भीषण गर्मी, कुपोषण या किसी अन्य कारण से हुई? पुलिस इस दिशा में जांच कर रही है.

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