– धरोहर, धार्मिक स्थलों से लेकर जंगल सफारी तक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
– रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद
नागपुर :- ‘ऑरेंज सिटी’, महाराष्ट्र की दूसरी राजधानी और ‘टाइगर कैपिटल ऑफ इंडिया’ के रूप में पहचान रखने वाले नागपुर जिले को महाराष्ट्र सरकार के पर्यटन विभाग ने अब आधिकारिक रूप से ‘पर्यटन जिला’ घोषित किया है। इस फैसले से जिले के ऐतिहासिक स्थलों, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संपदा और वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र पर्यटन नीति-2016 के तहत नागपुर को पहले ही ‘विशेष पर्यटन जिला’ का दर्जा दिया गया था। जिले की बढ़ती पर्यटन संभावनाओं, रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को देखते हुए इसे अलग से ‘पर्यटन जिला’ घोषित करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। पर्यटन विभाग ने अब इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है। नए दर्जे का प्रमुख उद्देश्य नागपुर के पर्यटन क्षेत्र का विस्तार कर अधिक पर्यटकों को आकर्षित करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। पर्यटन विभाग के उपसचिव संतोष रोकड़े द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पर्यटन के माध्यम से स्थानीय आर्थिक विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। इससे होटल, परिवहन, स्थानीय खान-पान, पर्यटक गाइड, हस्तशिल्प, लोककला और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों को लाभ मिलने की संभावना है।
गोंड और भोसले विरासत बनेगी आकर्षण का केंद्र
नागपुर का इतिहास गोंड राजाओं और भोसले राजघराने से जुड़ा रहा है। जिले में मौजूद ऐतिहासिक इमारतें, धरोहर स्थल और प्राचीन स्मारक इस समृद्ध अतीत की कहानी बयां करते हैं। संतरे के लिए देश-दुनिया में पहचान और प्राकृतिक संपदा भी जिले की पर्यटन क्षमता को और मजबूत करती है।
‘टाइगर कैपिटल’ से वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा
वन्यजीव पर्यटन के लिहाज से भी नागपुर का महत्वपूर्ण स्थान है। पेंच राष्ट्रीय उद्यान और उमरेड-करांडला वन्यजीव अभयारण्य जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल नागपुर को देश-विदेश के पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण गेटवे बनाते हैं। नए दर्जे से वन्यजीव पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के योजनाबद्ध विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
रामटेक से दीक्षाभूमि तक पर्यटन की बड़ी संभावनाएं
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन भी नागपुर जिले की प्रमुख ताकत है। रामटेक का ऐतिहासिक गढ़ पर स्थित राम मंदिर, खिंडसी और दीक्षाभूमि प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। इसके अलावा जिले के उद्यान, लोक परंपराएं, हस्तशिल्प और समृद्ध आदिवासी लोकनृत्य संस्कृति भी पर्यटकों को आकर्षित कर सकती है।
‘पर्यटन जिला’ का दर्जा मिलने के बाद नागपुर में धरोहर, धर्म, संस्कृति, प्रकृति और वन्यजीव पर्यटन को एकीकृत रूप से विकसित करने का अवसर मिलेगा। इससे नागपुर को महाराष्ट्र के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।





