– आरटीआई से खुला राज : स्कूलों को आदेश से पहले ही मिला 60-100 फीसदी तक का अनुदान
नागपुर :- हजारों करोड़ के शालार्थ आईडी घोटाले का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब नागपुर जिले में सिक्षा विभाग में एक और बड़ा अनुदान घोटाला सामने आया है. जिले की 12 शालाओं ने शासन की आंत्यों में धूल झओकते हुए करोड़ों रुपए का सरकारी अनुदान हड़प लिया इस मामले उन स्कूलों के शिक्षकों, पदाधिकारियों और हस वित्तीय अनियमितता के लिए जिम्मेदार तत्कालीन अधिकारियों पर मामले (एफआईआर) दर्ज करने के आदेत शालेय शिक्षा एवं क्रीड़ा विभाग उपसचिव मो. बा. ताशिलटार ने 13 अक्तूबर को नागपुर के विभागीय शिक्ष उपसंचालक को दिए हैं. यह खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता विजय गुप्ता की शिकायत के बाद हुआ. इस घोटाले की शिकायत गुप्ता ने वर्ष 2017 में शिक्षा उपसंचालक, शिक्षा आयुक्त, शिक्षा मंत्री और पुलिस विभाग को की थी. आरटीआई के माध्यम से निली जानकारी ने इन स्कूलों की हकीकत उजागर कर दी जानकारी के के अनुसार, सरकार से वर्ष 2013 में इन शालाओं ने स्कूल और उसकी शाखाओं के लिए अनुदान की मांग की थी. से ही अनुदान जारी कर दिया गया. वहीं। फरवरी 2017 के शासन निर्णय के अनुसार इसके बावजूद इन शालाओं को 2014 इन स्कूलों को सितंबर 2016 से ही चरण वृद्धि के अनुसार अनुदान वितरित करने के निर्देश थे. यानी आदेश से दो साल पहले ही इन शालाओं को अनुदान दे दिया गया था. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन शालाओं को केवल 20 प्रतिशत नहीं, बल्कि कुछ को 60, कुछ को 80 और कुछ को 100 प्रतिशत तक अनुदान वितरित किया गया. इसके साथ ही शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों की नियुक्तियों में भी अनियमितता की गई शिक्षा मंत्रालय नागपुर विभागीय शिक्षा उपसंचालक को ने विजय गुप्ता की शिकायत के बाद उत्कालीन शालेय शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में 14 मई 2018 को मंत्रालय में बैठक हुई थी. उसके बाद 18 मई को हुन 12 शालाओं के शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों और पदाधिकारियों की जांच के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं हुई. मामला बाद में न्यायालय में गया, तब से लेकर अब तक इन शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन भी दिया जा रहा है.
उसके बाद 2014 में सरकार ने नागपुर जिले को 20 फीसदी अनुदान में बढ़ोतरी के लिए पात्र घोषित किया था, लेकिन अनुदान विठाण का कोई आदेश जारी नहीं किया गया था इस इस पूरे घोटाले में शामिल शिक्षकों, पदाधिकारियों और तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं. आर्थिक अनियमितता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी अपराध किए जाएं. इनमें 2013 से 2017 के बीच के शिक्षाधिकारी (प्राथमिक), वेतन प्रथम अधीक्षक और अन्य संबंधित कर्मचारियों का समावेश है.




