spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

ड्रोन के झुंड को मिनटों में खत्म करेगा नया स्वदेशी डिफेंस सिस्टम ‘भार्गवास्त्र’

– परीक्षण अंतिम चरण में

नागपुर :- आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन और स्वार्म अटैक (एक साथ कई ड्रोन्स का हमला) सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और हालिया वैश्विक संघर्षों ने यह साबित कर दिया है कि महंगे एयर डिफेंस सिस्टम भी कई बार छोटे ड्रोन्स के ‘सैचुरेशन अटैक’ के सामने बेअसर साबित हो जाते हैं। इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए भारत ने एक अभूतपूर्व स्वदेशी तकनीक तैयार की है, जिसका नाम है काउंटर-ड्रोन सिस्टम।

सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड द्वारा विकसित यह स्वदेशी सिस्टम अब अपने अंतिम परीक्षण के दौर में पहुंच चुका है, जिसके ट्रायल दिसंबर 2026 तक पूरे होने की उम्मीद है।

भार्गवास्त्र दुनिया का पहला ऐसा गाइडेड माइक्रो-मिसाइल काउंटर-ड्रोन सिस्टम है जो बेहद कम लागत में अचूक सुरक्षा प्रदान करता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका मारक आर्किटेक्चर है:

लेयर्ड हार्ड-किल्ड क्षमता: यह दुश्मनों के ड्रोन और लॉइटरिंग मुनिशन को सीधे मारकर गिराने की तकनीक पर काम करता है।

सिंगल लॉन्चर से भारी तबाही: इसके एक सिंगल लॉन्चर में 8 \times 8 के कैसेट्स में कुल 64 माइक्रो-रॉकेट्स या मिसाइलें लोड की जा सकती हैं।

सैलवो मोड पूरा सिस्टम मात्र 10 सेकंड के भीतर सभी 64 हथियारों को एक साथ दागने की क्षमता रखता है। यह खूबी ड्रोन स्वार्म (झुंड में हमला) को हवा में ही नामोनिशान मिटाने के लिए काफी है।

भार्गवास्त्र को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह खतरे के हिसाब से अपने हथियारों का चुनाव करता है:

अनगाइडेड माइक्रो-रॉकेट्स: यह बड़े इलाके को कवर करने और आक्रामक ड्रोन झुंड को एक साथ तबाह करने के लिए दागे जाते हैं।

गाइडेड माइक्रो-मिसाइल्स: यह सटीक और सिंगल ‘हिट-टू-किल्ड’ हमलों के लिए इस्तेमाल होती हैं, जो सीधे तौर पर टारगेट को लॉक करके उसे ध्वस्त कर देती हैं।

भारत की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इसे ऑल-टेरेन अनुकूल बनाया गया है। यह सिस्टम रेगिस्तान के रेतीले मैदानों से लेकर 5,000 मीटर तक की ऊंचाई वाले बर्फीले पहाड़ी इलाकों में भी पूरी सटीकता के साथ काम करने में सक्षम है। इसे आसानी से किसी 7.5 टन श्रेणी के ऑल-टेरेन सैन्य वाहन पर माउंट करके तेजी से तैनात किया जा सकता है।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, देश के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों या रणनीतिक क्षेत्रों के चारों ओर सिर्फ 4 से 6 भार्गवास्त्र सिस्टम तैनात करने से एक ऐसा अभेद्य और ओवरलैपिंग सुरक्षा कवच तैयार हो जाएगा, जिसे भेदना दुश्मन के किसी भी ड्रोन नेटवर्क के लिए नामुमकिन होगा। यह ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत वायु रक्षा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी क्रांति है।


Click above on our news logo to access the Daily E_Newspaper.
For articles or advertisements, contact us at: dineshdamahe86@gmail.com.