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अब ऐप बताएगा असली-नकली दिव्यांग

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<p><strong>&&num;8211&semi; लाल परी में अब नहीं चलेगी &&num;8216&semi;जुगाड़&&num;8217&semi; वाली छूट<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p><strong>&&num;8211&semi; UDID ऐप से मौके पर होगी प्रमाण पत्रों की जांच<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p><strong>धुलिया &colon;-<&sol;strong> राज्य परिवहन महामंडल &lpar;एसटी&rpar; की बसों में दिव्यांग रियायत का अनुचित लाभ उठाने वाले फर्जी यात्रियों पर अब नकेल कसने की तैयारी हो गई है&period; वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तुकाराम मुंडे ने प्रदेश भर में दिव्यांग पहचान पत्रों की कड़ी जांच के आदेश दिए हैं&period; इस अभियान के तहत फर्जी या अवैध प्रमाण पत्र पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सीधे आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा और उसे जेल की हवा खानी पड़ सकती है&period;<&sol;p>&NewLine;<p>UDID ऐप से मौके पर होगी &&num;8216&semi;सर्जिकल स्ट्राइक&&num;8217&semi; &colon; नए निर्देशों के अनुसार&comma; अब एसटी के कंडक्टर और टिकट चेकिंग स्टाफ को हाई-टेक किया जा रहा है&period; कर्मचारी अपने मोबाइल में दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग की यूडीआईडी प्रणाली का उपयोग करेंगे&period; जैसे ही कोई यात्री रियायत का दावा करेगा&comma; कर्मचारी कार्ड नंबर और जन्म तिथि को ऐप में दर्ज करेंगे&period; यदि डाटा सरकारी सिस्टम से मैच होगा&comma; तभी टिकट में छूट दी जाएगी&period; इस डिजिटल जांच से कागज के फर्जी टुकड़ों के सहारे मुफ्त सफर करने वालों का खेल पूरी तरह खत्म हो जाएगा&period;<&sol;p>&NewLine;<p>धांधली पर मुंडे का कड़ा रुख &colon; प्रशासनिक अधिकारी तुकाराम मुंडे के संज्ञान में आया था कि पिछले कुछ समय में एसटी बसों में दिव्यांग रियायत लेने वालों की संख्या में संदिग्ध रूप से भारी बढ़ोतरी हुई है&period; जांच में पता चला कि कई लोग अपात्र होने के बावजूद एजेंटों के माध्यम से बने फर्जी का का इस्तेमाल कर रहे हैं&period; इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है&period; मुंडे ने स्पष्ट किया है कि &&num;8216&semi;दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम&comma; 2016&&num;8217&semi; का लाभ केवल वास्तविक हकदारों को ही मिलना चाहिए&period; दर्ज होगा केस&comma; कार्ड भी होगा जब्त &colon; नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए प्रशासन ने कड़ी सजा का प्रावधान किया है&period; यदि जांच के दौरान कार्ड फर्जी पाया गया&comma; तो अधिनियम की धारा 91 के तहत तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाएगा&period;<&sol;p>&NewLine;

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