नई दिल्ली :- नवरात्रि के पहले दिन देवी भगवती के 9 स्वरूपों में पहली शक्ति मा शैलपुत्री की पूजा की जाती है. देवी शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार देवी दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप ने देवासुर संग्राम के पहले दिन राक्षसों का वध किया था. हिंदू मान्यता के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के बाद सबसे पहले मां शैलपुत्री की विशेष पूजा की जाती है. आइए मां शैलपुत्री की पूजा विधि और उनका धार्मिक महत्व जानते हैं.
मां शैलपुत्री की पूजा विधि
हिंदू मान्यता के अनुसार मां शैलपुत्री की पूजा प्रात:काल स्नान-ध्यान के बाद घट स्थापना के बाद करना चाहिए. मां शैलपुत्री की पूजा प्रारंभ करने से पहले उनके लिए विशेष रूप से घी का दीपक जलाएं. इसके बाद माता को विशेष रूप से गुड़हल या फिर गुलाब का फूल अर्पित करना चाहिए. इसके बाद देवी की धूप-दीप, रोली-चंदन, सिंदूर, नारियल, फल, मिठाई आदि अर्पित करने के बाद विधि-विधान से पूजन करना चाहिए. इसके बाद माता के सामने अपनी मनोकामना कहें. देवी पूजा की आरती करने से पहले माता के प्रार्थना मंत्र को पढ़ें और उसके बाद ‘ॐ शं शैलपुत्रये फट्’ मंत्र का कम से कम एक माला जप करें. पूजा के अंत में मां शैलपुत्री की आरती करें तथा प्रसाद बांटें.




