– विभिन्न मांगों को लेकर सरकार को घेरा
नागपुर :- शीतकालीन अधिवेशन के अंतिम दिन भी जनाक्रोश थमता नजर नहीं आया. अलग–अलग सामाजिक संगठनों, समाजों और पीडि़त समूहों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर नागपुर की सडक़ों से लेकर विधानभवन तक सरकार के खिलाफ जोरदार हल्लाबोल किया. कुल सात अलग–अलग मोर्चों ने रविवार को सरकार के दरबार में दस्तक दी. भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि अब भी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा. नागपुर में शीतकालीन अधिवेशन के अंतिम दिन भी विरोध का सिलसिला जारी रहा. अलग–अलग मुद्दों को लेकर सात संगठनों ने मोर्चा निकालकर सरकार का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. भोई, ढिवर, कहार, केवट, निषाद एवं तत्सम समाजों ने नागपुर में भव्य मोर्चा निकाला. यह मोर्चा भोई समाज पंच कमेटी, नागपुर के नेतृत्व में आयोजित किया गया. समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मत्स्य मंत्री नितेश राणे को ज्ञापन सौंपा.
इसमें आरक्षण में वृद्धि, जाति वैधता प्रमाणपत्र के नियमों में शिथिलता, विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, आर्थिक विकास महामंडल की स्थापना, मछली विक्रेताओं के लिए बाजार सुविधा और शिक्षा व रोजगार में विशेष योजनाओं की मांग की गई. वहीं, जनकल्याण समाजोन्नती अन्याय भ्रष्टाचार निवारण समिति महाराष्ट्र ने भी विधानभवन को घेरा. समिति ने मुख्यमंत्री को 16 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा. इसमें किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी, स्मार्ट मीटर हटाने, जनसुरक्षा विधेयक रद्द करने, कपास और सोयाबीन को उचित समर्थन मूल्य देने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग शामिल है. इसके अलावा बेरोजगारी भत्ता, टोल मुक्त महाराष्ट्र, विदर्भ राज्य निर्माण, पर्यावरण प्रदूषण पर रोक और शिक्षा–स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए.
राष्ट्रीय जनाधार सामाजिक संगठन के नेतृत्व में समृद्ध जीवन ग्रृप ऑफ कंपनी और मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी के पीडि़त निवेशकों ने विधानभवन पर मोर्चा निकाला. यशवंत स्टेडियम, धंतोली से विधानभवन तक निकाले गए इस मोर्चे में पीडि़त लोग शामिल हुए. संगठन का आरोप है कि पिछले दस वर्षों से 44 लाख से अधिक निवेशकों के करीब 3,75० करोड़ रुपये अटके हुए हैं.
निवेशकों ने सरकार से जब्त संपत्तियों को बेचकर पूरी राशि ब्याज सहित लौटाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की. यवतमाल जिले से आए गुरुदेव युवा संघ का मोर्चा भी चर्चा का विषय रहा. संगठन ने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि आंदोलनकारियों को ‘चॉकलेट नहीं, न्याय चाहिए’ दिव्यांग, गरीब किसान, आदिवासी, पारधी समाज और वंचित घटकों की समस्याओं को लेकर संगठन ने आरोप लगाया कि 2० दिसंबर 2०24 को दिए गए आश्वासन अब तक पूरे नहीं हुए. कुल मिलाकर, शीतकालीन अधिवेशन के अंतिम दिन नागपुर में जनता का गुस्सा सडक़ों पर साफ नजर आया.
4 आंदोलनकर्ताओं की बिगड़ी तबियत
विधानसभा सत्र के अंतिम दिन रविवार को यशवंत स्टेडियम में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही. वेतन की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे 4 और शिक्षकों की तबीयत बिगडऩे से प्रदर्शनकारी और भी उग्र हो गए. स्कूल पहचान पत्र घोटाले के सामने आने के बाद से रा’य सरकार ने शिक्षकों का वेतन रोक रखा है. इसी वजह से शिक्षक आंदोलन के पहले दिन से ही भूख हड़ताल पर थे. इसी क्रम में रविवार सुबह 4 और शिक्षक बीमार पड़ गए. उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसके चलते नाराज शिक्षकों ने फिर से नारे लगाने शुरू कर दिए.




