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घुघूस कांग्रेस में खुला विद्रोह: सांसद धानोरकर के ‘कॉल’ को ठुकराने वाले राजू रेड्डी की सत्ता जाएगी ?

– रविश सिंह की एंट्री से राजनीति गरमाई!

सुशांत घाटे, प्रतिनिधी चंद्रपुर :- औद्योगिक शहर के रूप में पहचाने जाने वाले घुघूस नगर परिषद में इन दिनों राजनीतिक तापमान चरम पर है। वजह है—रिक्त पड़ा उपाध्यक्ष पद। इसी मुद्दे पर घुघूस शहर कांग्रेस में खुली फूट सामने आ गई है। शहर अध्यक्ष राजू रेड्डी और युवा नेता रविश सिंह के बीच सीधा टकराव देखने को मिल रहा है। सांसद प्रतिभा धानोरकर द्वारा रविश सिंह के नाम को समर्थन दिए जाने के बाद रेड्डी गुट की मुश्किलें बढ़ गई हैं और कांग्रेस के भीतर दो गुट साफ़ तौर पर उभर आए हैं।

बदले समीकरण, रविश सिंह का पलड़ा भारी?

घुघूस नगर परिषद की कुल 22 सीटों में से कांग्रेस ने 11 सीटें जीती थीं और 2 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन भी उसे मिला था। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) कोटे से निर्वाचित, लेकिन इस चुनाव में किंगमेकर की भूमिका निभा रहे रविश सिंह के पास इस समय 8 पार्षदों का ठोस समर्थन है। इनमें कांग्रेस के 11 में से 5 पार्षद खुलकर रविश सिंह के पक्ष में आ चुके हैं। इससे राजू रेड्डी के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सांसद धानोरकर का ‘कॉल’ और रेड्डी की घेराबंदी?

घुघूस की राजनीति में सांसद प्रतिभा धानोरकर का निर्णय अंतिम माना जाता है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, कार्यकुशलता और पार्षदों के विश्वास को देखते हुए सांसद ने रविश सिंह को उपाध्यक्ष पद के लिए हरी झंडी दे दी है।

इस फैसले से राजू रेड्डी गुट में असंतोष और बेचैनी फैल गई है। राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए रेड्डी द्वारा अंदरूनी जोड़-तोड़ और गुटबाज़ी को हवा देने के आरोप लग रहे हैं।

मनोनीत पार्षद पदों पर भी दावा, इस्तीफे का ‘परदे के पीछे’ खेल

कांग्रेस की यह खींचतान केवल उपाध्यक्ष पद तक सीमित नहीं है। अब दोनों गुट मनोनीत पार्षदों के दो पदों पर भी अपना-अपना दावा ठोक रहे हैं।

राजू रेड्डी ने अलग गुट बनाकर इन पदों पर अधिकार जताने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी बीच, उनके इस्तीफे की अफवाहें भी ज़ोरों पर हैं—यहां तक कि कुछ नव-निर्वाचित पार्षदों के इस्तीफे की चर्चाएं भी चल रही हैं।

हालांकि, हकीकत यह है कि कोई भी खुलकर इस्तीफा देने को तैयार नहीं। सूत्रों का कहना है कि यह सब राजनीतिक दबाव और रणनीतिक चालों का हिस्सा है। इस पूरे घटनाक्रम में राजू रेड्डी खुद अपने ही जाल में फंसते नजर आ रहे हैं।

क्या बीजेपी जैसा एक्शन करेगी कांग्रेस?

हाल ही में चंद्रपुर महानगर बीजेपी अध्यक्ष सुभाष कासनगोट्टुवार को पार्टी अनुशासन तोड़ने पर निष्कासित किया गया था। यह मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा कि अब घुघूस कांग्रेस में वैसी ही स्थिति बनती दिख रही है।

सांसद के निर्णय की अनदेखी कर ‘वेट एंड वॉच’ की भूमिका अपनाने वाले राजू रेड्डी पर कांग्रेस क्या कार्रवाई करेगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

‘फॉलो इन लाइन’ या निष्कासन?

कांग्रेस का अंदरूनी कलह अब सार्वजनिक मंच पर आ चुका है।

एक ओर रविश सिंह को बढ़ता जनसमर्थन और सांसद का संरक्षण मिल रहा है, तो दूसरी ओर राजू रेड्डी अपनी पकड़ ढीली पड़ती देख आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।

पार्टी सूत्रों के संकेत साफ़ हैं—अनुशासन तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में सवाल यह है कि राजू रेड्डी पार्टी लाइन में लौटेंगे या उन पर भी निष्कासन की गाज गिरेगी?

घुघूस नगर परिषद की सत्ता की इस शतरंज में किसकी बाज़ी लगेगी, कांग्रेस की यह आग ठंडी पड़ेगी या और भड़केगी, यह आने वाले कुछ दिनों में साफ़ हो जाएगा।

फिलहाल, रविश सिंह की तेज़ बढ़त ने राजू रेड्डी के वर्षों पुराने वर्चस्व को सीधी चुनौती दे दी है।


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