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पेंच के ‘स्टार’ बाघ अब अक्टूबर में

– 30 सितंबर तक पर्यटकों के लिए सफारी रहेगी बंद

नागपुर :- पेंच टाइगर रिजर्व के खुर्सापार, चोरबाहुली और सिल्लारी जंगल सफारी प्रवेश द्वार 1 जुलाई से मानसून के चलते पर्यटकों के लिए बंद कर दिए गए हैं। अब सफारी का संचालन 1 अक्टूबर से दोबारा शुरू होगा। ऐसे में पर्यटकों को अगले तीन महीनों तक पेंच के चर्चित बाघों और बाघिनों के दीदार के लिए इंतजार करना पड़ेगा।

सफारी बंद होने से खुर्सापार क्षेत्र की प्रसिद्ध बाघिन ‘बिंदू’ और बाघ ‘बारस’ व ;बिटू’, जबकि चोरबाहुली क्षेत्र के ‘रुद्रा’, ‘अकिरा’, ‘शंकरा’ और ‘महावीर’ जैसे लोकप्रिय बाघों का दर्शन फिलहाल संभव नहीं होगा। इस पर्यटन सत्र में इन बाघों को देखने के लिए देशभर से बड़ी संख्या में पर्यटक पेंच पहुंचे। हालांकि, पिछले कई महीनों से नजर नहीं आने वाली बाघिन दुर्गा इस बार भी पर्यटकों को दिखाई नहीं दी। देवलापार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सिल्लारी, खुर्सापार और चोरबाहुली सफारी गेट अपनी-अपनी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। पर्यटकों के अनुसार, सिल्लारी अपने घने जंगलों, चोरबाहुली हाथियों और पालई तालाब क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी, जबकि खुर्सापार नियमित रूप से होने वाले बाघ और अन्य वन्यजीवों के दर्शन के लिए सबसे अधिक लोकप्रिय है।

वन विभाग के अनुसार, कई बाघिनों के साथ उनके शावकों का भी इस सीजन में लगातार दीदार हुआ। उम्मीद है कि अक्टूबर में सफारी दोबारा शुरू होने तक ये शावक और बड़े हो जाएंगे, जिससे पर्यटकों का आकर्षण और बढ़ेगा। खास बात यह है कि कई जिप्सियों पर स्थानीय चालकों ने अपनी पसंदीदा बाघिनों के नाम भी लिख रखे हैं। चोरबाहुली के वनपरिक्षेत्र अधिकारी जयेश तायडे ने बताया कि इस सीजन में बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने से वन विभाग को अच्छा राजस्व प्राप्त हुआ। साथ ही जिप्सी चालकों, गाइडों और स्थानीय लोगों को भी रोजगार के पर्याप्त अवसर मिले। वहीं, खुर्सापार-देवलापार के वनपरिक्षेत्र अधिकारी सागर केदार ने कहा कि नियमित बाघ दर्शन के कारण खुर्सापार सफारी गेट कम समय में ही पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण बन गया है। उन्होंने कहा कि बाघ संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और स्थानीय लोगों को रोजगार देना भी विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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