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पिपरिया बना अवैध पशु तस्करी का अड्डा

– पशु खरीद-फरोख्त से बढ़ी समस्या, आवारा छोड़े जा रहे छोटे बछड़े,भूख से मरने की कगार पर

– ग्राम पंचायत ने जिला प्रशासन से लगाई रोक लगाने की मांग

यासीन शेख, गोंदिया :- सालेकसा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपरिया जो तीन राज्यों का केंद्र बिंदु इन दिनों अवैध पशु खरीद-फरोख्त को लेकर गंभीर समस्या सामने आ रही है. ग्राम पंचायत के अनुसार छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश से आने वाले कुछ व्यापारी यहां बड़े पैमाने पर मवेशियों की खरीद-फरोख्त करते हैं.आरोप है कि व्यापारी बड़े जानवरों को खरीदकर उन्हें कत्लखाने तक ले जाते हैं, जबकि छोटे बछड़ों को गांव में ही लावारिस हालत में छोड़कर चले जाते हैं.

गांव में छोड़े गए ये छोटे बछडे इधर-उधर भटकते रहते हैं. तथा चारा और देखभाल की व्यवस्था न होने के कारण कई छोटे बछडे भूखे-प्यासे रह जाते हैं.ग्रामीणों का कहना है कि भोजन और देखभाल के अभाव में कई छोटे बछडे की लावारिस हालत मे मौत भी हो चुकी है और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.इससे गांव में दयनीय स्थिति बन गई है, और पशुओं के शव मिलने से स्वच्छता और स्वास्थ्य की समस्या भी उत्पन्न हो रही है.

ग्रामवासियों ने बताया कि गांव में घूम रहे इन छोटे बछड़े को कोई मालिक संभालता और न ही उनके लिए चारा की व्यवस्था की जाती है. ऐसे में ये जानवर भूख से तड़प-तड़प कर मरने को मजबूर हो रहे हैं. ग्राम पंचायत ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की है.

ग्राम पंचायतके लोगों ने निर्णय लिया है कि इस विषय को लेकर जिला अधिकारी को लिखित पत्र भेजा गया है. तथा इस पत्र में मांग की किया गया है की पिपरिया क्षेत्र में होने वाली इस तरह की अवैध पशु खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई जाए और जो व्यापारी छोटे बछड़े को गांव में छोड़कर जाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाया तो गांव में आवारा पशुओं की संख्या और बढ़ेगी तथा पशुओं की मौत का सिलसिला भी जारी रहेगा. इसलिए जिला प्रशासन से शीघ्र जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग का पत्र ग्राम पंचायत की ओर से भेजा गया है.

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