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नागपुर में राजनीतिक ड्रामा

– महायुति में सुलझा सीट बंटवारे का फॉर्मूला, शिंदे सेना को 8 सीटें

– नामांकन की आखिरी घड़ी में बड़ा फैसला : गडकरी के घर बैठक, भाजपा-शिंदे सेना में बनी सहमति

 नागपुर :- मनपा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि मंगलवार थी. हालांकि, नागपुर में महायुति गठबंधन के सीट बंटवारे को लेकर चल रही अटकलों के चलते तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं. सोमवार आधी रात को आखिरकार गतिरोध सुलझ गया और नागपुर में शिंदे सेना को 8 सीटें देने का फैसला किया गया. भाजपा और शिंदे सेना के पदाधिकारियों के बीच एक लंबी बैठक हुई जिसमें यह फॉर्मूला तय किया गया. इस बीच, गठबंधन को लेकर भाजपा की ओर से कोई प्रतिसाद न मिलने पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार) ने अकेले चुनाव लडऩे का फैसला किया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने सोमवार रात करीब 4० उम्मीदवारों को एबी फॉर्म वितरित किए. सोमवार रात केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के आवास पर भाजपा और शिंदे सेना के पदाधिकारियों की बैठक हुई. इसमें राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, विधायकगण प्रवीण दटके, कृष्णा खोपड़े, मोहन मते सहित संजय भेंडे मुख्य रूप से उपस्थित थे. वहीं शिंदे सेना की ओर से राज्यमंत्री आशीष जायसवाल, विधायक कृपाल तुमाने, पूर्वी विदर्भ प्रमुख किरण पांडव और सूरज गोजे उपस्थित थे.

बैठक में विस्तृत चर्चा हुई और आधी रात के बाद एक समाधान पर पहुंचा गया. 151 सीटों में से 8 सीटें शिंदे सेना के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया गया. इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि शिंदे सेना के उम्मीदवार किन सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इसकी पुष्टि की. शिंदे सेना के साथ सकारात्मक बातचीत हुई. गठबंधन का लक्ष्य 51 प्रतिशत वोट हासिल करना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि शिंदे सेना को 8 सीटें दी गई हैं.

अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान

शिंदे सेना ने भाजपा पदाधिकारियों से मुलाकात कर कम से कम 5० से 6० सीटों की मांग की. इससे बैठक में मौजूद भाजपा पदाधिकारी भी हैरान रह गए. भाजपा ने खुद 18०० से अधिक इच्छुक उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया था और सोमवार रात तक 1००० से अधिक उम्मीदवारों को उम्मीदवारी फॉर्म वितरित किए थे. शहर के नेताओं ने रविवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी इस मुद्दे पर चर्चा की थी. हालांकि, भाजपा ने घटक दलों को दी जाने वाली सीटों की सटीक संख्या पर चुप्पी साध रखी है. वे उन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे जहां उन्हें जीत का पूरा भरोसा है. उन्होंने पदाधिकारियों को यह भी जांच करने का निर्देश दिया है कि क्या वे वहां जीतने में सक्षम हैं या नहीं.


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